नई दिल्ली : अगर भारत चाहे तो पाकिस्तान उसके
सामने घुटने टेक सकता है। दरअसल, भारत ने 1960 में पाकिस्तान के साथ इंडस वाटर ट्रीटी
की थी। इस ट्रीटी के मुताबिक, भारत अपनी 6 नदियों से
पाकिस्तान को खुद से ज्यादा पानी दे रहा है। अगर इस ट्रीटी को भारत रद्द कर दे,
तो पाकिस्तान की रीढ़ की हड्डी टूट जाएगी और वो हर शर्त मानने को
तैयार हो सकता है। और इससे पाकिस्तान के साथ-साथ चीन को भी बड़ा झटका लगेगा।
भारत ने वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में पाक के साथ
19 सितंबर 1960 को कराची में इंडस वाटर ट्रीटी की थी। इस ट्रीटी पर फॉर्मर पीएम
जवाहर लाल नेहरू और पाक के फॉर्मर प्रेसिडेंट जनरल अयूब खान ने साइन किए थे। इसके
मुताबिक, भारत पाक
को अपनी सिंधु, झेलम, चिनाब, सतलुज, व्यास और रावी नदी का पानी देगा। बता दे कि इन
नदियों का 80 फीसदी से ज्यादा पानी पाकिस्तान को मिलता है।
आपको बता दे कि चीन और पाकिस्तान के बीच बन रहा
चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) एशिया की तस्वीर बदलने जा रहा है। इस
बदली तस्वीर सबसे ज्यादा फायदा पाक को होगा, जबकि भारत के लिए यह चिंता का
विषय बन सकता है। हाल यह है कि विशेषज्ञ सीपीईसी को भारत और पाक के बीच ‘गेम चेंजर’ कहने लगे हैं। पाकिस्तान को एशिया का नया
टाइगर बताया जा रहा है।
बता दे कि सीपीईसी पर चीन 75 बिलियन डॉलर खर्च
करेगा। इसमें से 45 मिलियन डॉलर 2020 तक खर्च कर सीपीईसी का रूट ऑपरेशनल तौर पर
शुरू कर दिया जाएगा। सीपीईसी 3 हजार 218 किलोमीटर लंबा रूट होगा। इसे बनाने में 15
साल से ज्यादा का वक्त लगेगा। इसमें हाइवे, रेलवे और पाइपलाइन के जरिए चीन के
शिनजांग से पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को जोड़ा जाएगा।
2017 तक ग्वादर इंटरनैशनल एयरपोर्ट का निर्माण कर
लिया जाएगा। इसके साथ ही ग्वादर पोर्ट से जुड़े कई बड़े कामों को पूरा कर लिया
जाएगा। काराकोरम हाइवे के विस्तार से चीन और पाक आपस में जुड़ेंगे। इसके साथ दोनों
देशों में बढ़िया संपर्क के लिए फाइबर-ऑप्टिक लाइन को जगह दी जाएगी। कहा जा रहा है
कि चीन का अब तक का विदेश में यह सबसे बड़ा निवेश है।
इस प्रोजेक्ट से पाकिस्तान में 2030 तक सात लाख
लोगों को रोजगार मिल जाएगा। पाक की विकास दर ढाई फीसदी तक बढ़ जाएगी। वहीं, चीन इस
रूट के जरिए मध्य पूर्व तक अपनी आसान पहुंच बना लेगा। पेइचिंग से 45 दिनों के मुकाबले
महज 10 दिनों में वेस्ट एशिया के जरिए यूरोप पहुंच जाएगा।
चीन स्ट्रैट ऑफ मलाका के जरिए यह सफर तय करेगा।
पेइचिंग से अरब की खाड़ी का वास्तविक रूट 12,900 किलोमीटर का है। चीन और पाकिस्तान
के बीच प्रस्तावित सीपीइसी 2,000 किलोमीटर का है। इससे चीन को अमेरिकी नीतियों से
मुकाबला करने में भी मदद मिलेगी। सीपीइसी प्रॉजेक्ट में लगे 7,036 चीनी नागरिकों
की सुरक्षा में 14,503 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी लगे हुए हैं।
दरअसल, तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी),
अल कायदा और जुनदुल्लाह ने इस प्रोजेक्ट को बाधित करने की धमकी दी
है। इसी वजह से सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। अगर भारत सिंधु जल संधि को
तोड़ दे तो पाकिस्तान की सांसें अटक जाएंगी।
आपको बता दे कि अगर भारत भी चीन की तरह सख्त रुख
अपना ले तो पाक का हाल बद से बदतर हो जाएगा। सीपीईसी भी काम नहीं आएगा। बता दें कि
चीन का अपने यहां से निकलने वाली नदियों के पानी पर पूरा प्रभुत्व है। चीन ने अपने
13 पड़ोसी देशों के साथ जल साझेदारी का कोई समझौता तक नहीं किया।
पाक पर ये पड़ेगा असर :-
इन नदियों का पानी बंद कर देने से पाकिस्तान का
एग्रीकल्चर पूरी तरह तबाह हो जाएगा। क्योंकि, यां खेती बारिश पर नहीं, बल्कि इन नदियों के पानी पर डिपेंट (निर्भर) है। इसलिए पाकिस्तान भारत के
बगलियार और किशनगंगा पावर प्रोजेक्ट्स का इंटरनेशनल लेवल पर विरोध करता है।
ये प्रोजेक्ट्स बन जाने के बाद उसे मिलने वाले
पानी में कमी आ जाएगी और वहां परेशानी बढ़ जाएगी।
आपको बता दे कि 2005 में इंटरनेशल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट
और टाटा वाटर पॉलिसी प्रोग्राम भी इस ट्रीटी को खत्म करने की डिमांड कर चुके हैं। इनकी
रिपोर्ट के मुताबिक, इस ट्रीटी की वजह से जम्मू-कश्मीर को हर साल 60 हजार
करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।
जम्मू-कश्मीर में की घाटी में 20000 मेगावाट से भी
ज्यादा बिजली पैदा की जा सकती है, लेकिन ट्रीटी की वजह से ये पॉसिबल नहीं है।
नई दिल्ली : अगर भारत चाहे तो पाकिस्तान उसके
सामने घुटने टेक सकता है। दरअसल, भारत ने 1960 में पाकिस्तान के साथ इंडस वाटर ट्रीटी
की थी। इस ट्रीटी के मुताबिक, भारत अपनी 6 नदियों से
पाकिस्तान को खुद से ज्यादा पानी दे रहा है। अगर इस ट्रीटी को भारत रद्द कर दे,
तो पाकिस्तान की रीढ़ की हड्डी टूट जाएगी और वो हर शर्त मानने को
तैयार हो सकता है। और इससे पाकिस्तान के साथ-साथ चीन को भी बड़ा झटका लगेगा।
भारत ने वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में पाक के साथ
19 सितंबर 1960 को कराची में इंडस वाटर ट्रीटी की थी। इस ट्रीटी पर फॉर्मर पीएम
जवाहर लाल नेहरू और पाक के फॉर्मर प्रेसिडेंट जनरल अयूब खान ने साइन किए थे। इसके
मुताबिक, भारत पाक
को अपनी सिंधु, झेलम, चिनाब, सतलुज, व्यास और रावी नदी का पानी देगा। बता दे कि इन
नदियों का 80 फीसदी से ज्यादा पानी पाकिस्तान को मिलता है।
आपको बता दे कि चीन और पाकिस्तान के बीच बन रहा
चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) एशिया की तस्वीर बदलने जा रहा है। इस
बदली तस्वीर सबसे ज्यादा फायदा पाक को होगा, जबकि भारत के लिए यह चिंता का
विषय बन सकता है। हाल यह है कि विशेषज्ञ सीपीईसी को भारत और पाक के बीच ‘गेम चेंजर’ कहने लगे हैं। पाकिस्तान को एशिया का नया
टाइगर बताया जा रहा है।
बता दे कि सीपीईसी पर चीन 75 बिलियन डॉलर खर्च
करेगा। इसमें से 45 मिलियन डॉलर 2020 तक खर्च कर सीपीईसी का रूट ऑपरेशनल तौर पर
शुरू कर दिया जाएगा। सीपीईसी 3 हजार 218 किलोमीटर लंबा रूट होगा। इसे बनाने में 15
साल से ज्यादा का वक्त लगेगा। इसमें हाइवे, रेलवे और पाइपलाइन के जरिए चीन के
शिनजांग से पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को जोड़ा जाएगा।
2017 तक ग्वादर इंटरनैशनल एयरपोर्ट का निर्माण कर
लिया जाएगा। इसके साथ ही ग्वादर पोर्ट से जुड़े कई बड़े कामों को पूरा कर लिया
जाएगा। काराकोरम हाइवे के विस्तार से चीन और पाक आपस में जुड़ेंगे। इसके साथ दोनों
देशों में बढ़िया संपर्क के लिए फाइबर-ऑप्टिक लाइन को जगह दी जाएगी। कहा जा रहा है
कि चीन का अब तक का विदेश में यह सबसे बड़ा निवेश है।
इस प्रोजेक्ट से पाकिस्तान में 2030 तक सात लाख
लोगों को रोजगार मिल जाएगा। पाक की विकास दर ढाई फीसदी तक बढ़ जाएगी। वहीं, चीन इस
रूट के जरिए मध्य पूर्व तक अपनी आसान पहुंच बना लेगा। पेइचिंग से 45 दिनों के मुकाबले
महज 10 दिनों में वेस्ट एशिया के जरिए यूरोप पहुंच जाएगा।
चीन स्ट्रैट ऑफ मलाका के जरिए यह सफर तय करेगा।
पेइचिंग से अरब की खाड़ी का वास्तविक रूट 12,900 किलोमीटर का है। चीन और पाकिस्तान
के बीच प्रस्तावित सीपीइसी 2,000 किलोमीटर का है। इससे चीन को अमेरिकी नीतियों से
मुकाबला करने में भी मदद मिलेगी। सीपीइसी प्रॉजेक्ट में लगे 7,036 चीनी नागरिकों
की सुरक्षा में 14,503 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी लगे हुए हैं।
दरअसल, तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी),
अल कायदा और जुनदुल्लाह ने इस प्रोजेक्ट को बाधित करने की धमकी दी
है। इसी वजह से सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जा रहा है। अगर भारत सिंधु जल संधि को
तोड़ दे तो पाकिस्तान की सांसें अटक जाएंगी।
आपको बता दे कि अगर भारत भी चीन की तरह सख्त रुख
अपना ले तो पाक का हाल बद से बदतर हो जाएगा। सीपीईसी भी काम नहीं आएगा। बता दें कि
चीन का अपने यहां से निकलने वाली नदियों के पानी पर पूरा प्रभुत्व है। चीन ने अपने
13 पड़ोसी देशों के साथ जल साझेदारी का कोई समझौता तक नहीं किया।
पाक पर ये पड़ेगा असर :-
इन नदियों का पानी बंद कर देने से पाकिस्तान का
एग्रीकल्चर पूरी तरह तबाह हो जाएगा। क्योंकि, यां खेती बारिश पर नहीं, बल्कि इन नदियों के पानी पर डिपेंट (निर्भर) है। इसलिए पाकिस्तान भारत के
बगलियार और किशनगंगा पावर प्रोजेक्ट्स का इंटरनेशनल लेवल पर विरोध करता है।
ये प्रोजेक्ट्स बन जाने के बाद उसे मिलने वाले
पानी में कमी आ जाएगी और वहां परेशानी बढ़ जाएगी।
आपको बता दे कि 2005 में इंटरनेशल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट
और टाटा वाटर पॉलिसी प्रोग्राम भी इस ट्रीटी को खत्म करने की डिमांड कर चुके हैं। इनकी
रिपोर्ट के मुताबिक, इस ट्रीटी की वजह से जम्मू-कश्मीर को हर साल 60 हजार
करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।
जम्मू-कश्मीर में की घाटी में 20000 मेगावाट से भी
ज्यादा बिजली पैदा की जा सकती है, लेकिन ट्रीटी की वजह से ये पॉसिबल नहीं है।
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