Monday, 27 June 2016

MTCR समूह का आज पूर्ण सदस्य बनेगा भारत, चीन और पाकिस्तान से निकला आगे!

Dainik Times     09:11    
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नई दिल्ली : भारत सोमवार को मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में औपचारिक तौर पर शामिल हो जाएगा। दुनिया के चार महत्वपूर्ण परमाणु टेक्नोलॉजी निर्यात करने वाले खास देशों के समूह में एमटीसीआर अहम है। परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) में शामिल होने की हालिया कोशिश की नाकामी बाद इसे बेहतर माना जा रहा है। पिछले साल ही भारत ने एमटीसीआर की सदस्यता के लिए आवेदन किया था।

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एनएसजी में शामिल होने की कोशिश भी जारी :-

विदेश सचिव एस जयशंकर सोमवार को फ्रांस, नीदरलैंड और लक्जमबर्ग के राजदूतों की मौजूदगी में इस क्लब में शामिल होने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने एनएसजी की सदस्यता न मिलने को नाकामी मानने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में हमें अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।

ऑस्ट्रेलियन ग्रुप और वास्सेनार एग्रीमेंट में शामिल होने की भी कोशिश :-

एमटीसीआर में शामिल होने के बाद भारत दो अन्य समूहों ऑस्ट्रेलियन ग्रुप और वास्सेनार एग्रीमेंट में शामिल होने की कोशिश करने वाला है। एनएसजी की सदस्यता के लिए भी कोशिश जारी रखने की बात कही गई है। स्वरूप ने बताया कि सोमवार को भारत एमटीसीआर का पूर्ण रूप से सदस्य बन जाएगा।

बड़े विनाश पर रोकथाम है एमटीसीआर का मकसद :-

एमटीसीआर का मकसद मिसाइलों के प्रसार को प्रतिबंधित करना, रॉकेट सिस्टम को पूरा करने के अलावा मानव रहित जंगी जहाजों पर 500 किलोग्राम भार के मिसाइल को 300 किलोमीटर तक ले जाने की क्षमता वाली तकनीक को बढ़ावा देना है। बड़े विनाश वाले हथियारों और तकनीक पर पाबंदी लगाना इस समूह का मकसद है।

मिसाइल के मामले में भारत पावरफुल :-

एमटीसीआर का सदस्य बनने से भारत को प्रमुख उत्पादक देशों से अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और मॉनीटरिंग सिस्टम खरीद में मदद मिलेगी। आप को बता दे कि सिर्फ एमटीसीआर सदस्य देश ही इसे खरीद सकते हैं। सदस्यता के साथ ही भारत के लिए अमेरिका से ड्रोन तकनीकी लेना भी सरल हो जाएगा। और मिसाइल टेक्नोलॉजी का निर्यात भी कर सकेगा।

हेग आचार संहिता के लिए भारत की दावेदारी होगी मजबूत :-

इसकी सदस्यता के बाद भारत के हेग आचार संहिता में शामिल होने की दावेदारी को मजबूती मिलेगी। यह संहिता बैलेस्टिक मिसाइल अप्रसार संधि की निगरानी करती है। इसके साथ ही रूस के साथ हमारी साझा कोशिशों को बल मिलेगा।

चीन और पाकिस्तान से आगे है हम :-

एमटीसीआर में कुल 34 प्रमुख मिसाइल निर्माता देश शामिल हैं। इसकी स्थापना 1987 में की गई थी। फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका , इटली और कनाडा इसके संस्थापक सदस्य रहे हैं। बुल्गारिया साल 2004 में इस समूह का सदस्य बना था। इसके बाद किसी नए देश को इसका मौका नहीं मिला। अभी तक चीन और पाकिस्तान इस विशेष समूह के सदस्य नहीं हैं।

नई दिल्ली : भारत सोमवार को मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) में औपचारिक तौर पर शामिल हो जाएगा। दुनिया के चार महत्वपूर्ण परमाणु टेक्नोलॉजी निर्यात करने वाले खास देशों के समूह में एमटीसीआर अहम है। परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) में शामिल होने की हालिया कोशिश की नाकामी बाद इसे बेहतर माना जा रहा है। पिछले साल ही भारत ने एमटीसीआर की सदस्यता के लिए आवेदन किया था।

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एनएसजी में शामिल होने की कोशिश भी जारी :-

विदेश सचिव एस जयशंकर सोमवार को फ्रांस, नीदरलैंड और लक्जमबर्ग के राजदूतों की मौजूदगी में इस क्लब में शामिल होने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने एनएसजी की सदस्यता न मिलने को नाकामी मानने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में हमें अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।

ऑस्ट्रेलियन ग्रुप और वास्सेनार एग्रीमेंट में शामिल होने की भी कोशिश :-

एमटीसीआर में शामिल होने के बाद भारत दो अन्य समूहों ऑस्ट्रेलियन ग्रुप और वास्सेनार एग्रीमेंट में शामिल होने की कोशिश करने वाला है। एनएसजी की सदस्यता के लिए भी कोशिश जारी रखने की बात कही गई है। स्वरूप ने बताया कि सोमवार को भारत एमटीसीआर का पूर्ण रूप से सदस्य बन जाएगा।

बड़े विनाश पर रोकथाम है एमटीसीआर का मकसद :-

एमटीसीआर का मकसद मिसाइलों के प्रसार को प्रतिबंधित करना, रॉकेट सिस्टम को पूरा करने के अलावा मानव रहित जंगी जहाजों पर 500 किलोग्राम भार के मिसाइल को 300 किलोमीटर तक ले जाने की क्षमता वाली तकनीक को बढ़ावा देना है। बड़े विनाश वाले हथियारों और तकनीक पर पाबंदी लगाना इस समूह का मकसद है।

मिसाइल के मामले में भारत पावरफुल :-

एमटीसीआर का सदस्य बनने से भारत को प्रमुख उत्पादक देशों से अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और मॉनीटरिंग सिस्टम खरीद में मदद मिलेगी। आप को बता दे कि सिर्फ एमटीसीआर सदस्य देश ही इसे खरीद सकते हैं। सदस्यता के साथ ही भारत के लिए अमेरिका से ड्रोन तकनीकी लेना भी सरल हो जाएगा। और मिसाइल टेक्नोलॉजी का निर्यात भी कर सकेगा।

हेग आचार संहिता के लिए भारत की दावेदारी होगी मजबूत :-

इसकी सदस्यता के बाद भारत के हेग आचार संहिता में शामिल होने की दावेदारी को मजबूती मिलेगी। यह संहिता बैलेस्टिक मिसाइल अप्रसार संधि की निगरानी करती है। इसके साथ ही रूस के साथ हमारी साझा कोशिशों को बल मिलेगा।

चीन और पाकिस्तान से आगे है हम :-

एमटीसीआर में कुल 34 प्रमुख मिसाइल निर्माता देश शामिल हैं। इसकी स्थापना 1987 में की गई थी। फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका , इटली और कनाडा इसके संस्थापक सदस्य रहे हैं। बुल्गारिया साल 2004 में इस समूह का सदस्य बना था। इसके बाद किसी नए देश को इसका मौका नहीं मिला। अभी तक चीन और पाकिस्तान इस विशेष समूह के सदस्य नहीं हैं।

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