नई दिल्ली : अमेरिका
ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के बदले पाक को दी जाने वाली 20 अरब रुपये की सैन्य
मदद रोकने पर मुहर लगा दी है। जिससे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने
मंगलवार को पाक को यह नसीहत भी दी कि आतंकियों पर कार्रवाई में ही पाकिस्तान की
भलाई है।
रक्षा मंत्रालय
पेंटागन के प्रेस सचिव पीटर कुक ने कहा कि अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के
खिलाफ पाक की कार्रवाई को अमेरिकी संसद ने पर्याप्त नहीं माना और उसे सैन्य मदद के
लिए जरूरी प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया। लिहाजा अमेरिका उसे 30 करोड़ डालर
(20 अरब रुपये) की सैन्य मदद नहीं दे पाएगा।
कुक ने स्पष्ट कहा कि
यह पाकिस्तान के हित में है कि वह आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हरसंभव तरीका
आजमाए। दरअसल, अफगानिस्तान में अमेरिकी कार्रवाई में मदद
के नाम पर पाकिस्तानी फौज को 30 करोड़ डॉलर यानी करीब 20 अरब 12 करोड़ रुपये की
मदद दी जानी थी। लेकिन 30 जून की समयसीमा में इस पर अमेरिकी संसद ने स्वीकृति नहीं
दी।
आपको बता दे कि पिछले
पांच साल में अमेरिका से पाक को सैन्य मदद में 73 प्रतिशत की कमी आई है। अमेरिकी संसद
की 'कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस' (सीआरएस) की रिपोर्ट ने
यह खुलासा किया है।
पाकिस्तानी दैनिक 'डान' के मुताबिक, इसमें 2002
से 2015 के बीच पाक को दी गई सैन्य और आर्थिक मदद इसमें शामिल है। इसमें बताया गया
है कि साल 2011 से पाक को अमेरिकी आर्थिक सहायता में 53 प्रतिशत और सैन्य मदद में
73 प्रतिशत की कमी हुई है।
सैन्य
मदद :-
2011
: 1.3 अरब डालर
2015
: 34.3 करोड़ डालर
आर्थिक
सहायता :-
2011
: 1.2 अरब डालर
2015
: 56.1 करोड़ डालर
#बता दे कि 2002 से
अब तक 14 अरब डालर (939 अरब रुपये) पाक को मिले है।
#18 अरब की छूट से
इनकार पर मई में एफ-16 का सौदा रद्द हुआ था।
वहीं अफगानिस्तान में
भारत और अमेरिकी दूतावास समेत कई केंद्रों पर आत्मघाती हमलों और अपहरण की वारदातों
में हक्कानी नेटवर्क का हाथ रहा है। काबुल में वर्ष 2008 में भारतीय दूतावास पर
हुए हमले में भी हक्कानी गुट के आतंकियों का हाथ था, इस
हमले में 58 लोग मारे गए थे।
नई दिल्ली : अमेरिका
ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के बदले पाक को दी जाने वाली 20 अरब रुपये की सैन्य
मदद रोकने पर मुहर लगा दी है। जिससे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने
मंगलवार को पाक को यह नसीहत भी दी कि आतंकियों पर कार्रवाई में ही पाकिस्तान की
भलाई है।
रक्षा मंत्रालय
पेंटागन के प्रेस सचिव पीटर कुक ने कहा कि अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क के
खिलाफ पाक की कार्रवाई को अमेरिकी संसद ने पर्याप्त नहीं माना और उसे सैन्य मदद के
लिए जरूरी प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया। लिहाजा अमेरिका उसे 30 करोड़ डालर
(20 अरब रुपये) की सैन्य मदद नहीं दे पाएगा।
कुक ने स्पष्ट कहा कि
यह पाकिस्तान के हित में है कि वह आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए हरसंभव तरीका
आजमाए। दरअसल, अफगानिस्तान में अमेरिकी कार्रवाई में मदद
के नाम पर पाकिस्तानी फौज को 30 करोड़ डॉलर यानी करीब 20 अरब 12 करोड़ रुपये की
मदद दी जानी थी। लेकिन 30 जून की समयसीमा में इस पर अमेरिकी संसद ने स्वीकृति नहीं
दी।
आपको बता दे कि पिछले
पांच साल में अमेरिका से पाक को सैन्य मदद में 73 प्रतिशत की कमी आई है। अमेरिकी संसद
की 'कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस' (सीआरएस) की रिपोर्ट ने
यह खुलासा किया है।
पाकिस्तानी दैनिक 'डान' के मुताबिक, इसमें 2002
से 2015 के बीच पाक को दी गई सैन्य और आर्थिक मदद इसमें शामिल है। इसमें बताया गया
है कि साल 2011 से पाक को अमेरिकी आर्थिक सहायता में 53 प्रतिशत और सैन्य मदद में
73 प्रतिशत की कमी हुई है।
सैन्य
मदद :-
2011
: 1.3 अरब डालर
2015
: 34.3 करोड़ डालर
आर्थिक
सहायता :-
2011
: 1.2 अरब डालर
2015
: 56.1 करोड़ डालर
#बता दे कि 2002 से
अब तक 14 अरब डालर (939 अरब रुपये) पाक को मिले है।
#18 अरब की छूट से
इनकार पर मई में एफ-16 का सौदा रद्द हुआ था।
वहीं अफगानिस्तान में
भारत और अमेरिकी दूतावास समेत कई केंद्रों पर आत्मघाती हमलों और अपहरण की वारदातों
में हक्कानी नेटवर्क का हाथ रहा है। काबुल में वर्ष 2008 में भारतीय दूतावास पर
हुए हमले में भी हक्कानी गुट के आतंकियों का हाथ था, इस
हमले में 58 लोग मारे गए थे।
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