नई दिल्ली : कश्मीर
में बीते 45 दिन से जारी कर्फ्यू के बीच आज कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर
अब्दुल्ला के नेतृत्व में राज्य के विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जमीनी
परिस्थितियों की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे
घाटी में व्याप्त अशांति से निपटने के लिए राजनीतिक रूख अपनाएं।
उमर के नेतृत्व वाले
शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि कश्मीर में अशांति से निपटने में लगातार
विफल रहने से अलगाव की भावना गहरी होगी। उमर के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने
प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि वे कश्मीर घाटी में सभी पक्षों के साथ तुरंत
बातचीत शुरू करें। जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों के शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री
मोदी को ज्ञापन सौंपकर राज्य में पैलेट बंदूकों पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग
की।
आपको बता दे कि घाटी
में बीते 45 दिन से कर्फ्यू लगा हुआ है। वहां के मौजूदा हालात के मद्देनजर राज्य
के सभी विपक्षी दल दलगत सीमाओं से परे जाकर एकजुट हुए हैं और उन्होंने केंद्र से
अनुरोध किया है कि वह राज्य में सभी पक्षों के साथ राजनीतिक वार्ता की शुरूआत करे।
उमर के अलावा इस
शिष्टमंडल में प्रदेश कांग्रेस का सात सदस्यीय दल और मुख्य विपक्ष नेशनल कांफ्रेंस
का आठ सदस्यीय दल शामिल है। यह शिष्टमंडल राष्ट्रीय राजधानी में है और सरकार एवं
विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर रहा है। शिष्टमंडल में कांग्रेस दल का नेतृत्व
प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख जी ए मीर कर रहे हैं। नेशनल कांफ्रेंस के दल में
इसके प्रांतीय प्रमुख नसीर वानी और देविंदर राणा भी हैं। इनके अलावा माकपा के
विधायक एम वाई तरीगामी भी इस शिष्टमंडल में शामिल हैं।
आपको बता दे कि शिष्टमंडल
ने घाटी में लोगों की मौतों पर नाराजगी और दुख प्रकट करते हुए और हालात से निपटने
में राजनीतिक रूख के अभाव पर निराशा जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन
सौंपा।
शिष्टमंडल ने
प्रधानमंत्री को बताया कि कश्मीर में राजनीतिक समस्या का निपटान राजनीतिक तरीके से
करने के बजाय पहले भी आजमाए जा चुके प्रशासनिक तरीकों से करने के कारण स्थिति और
अधिक बिगड़ी है और इसके कारण असंतोष और मोहभंग की अभूतपूर्व अनुभूति पैदा हुई है।
यह भावना विशेष तौर पर युवाओं में पनपी है।
ज्ञापन में कहा गया
है कि हमारा यह दृढ़ मत है कि केंद्र सरकार को अब और अधिक समय बर्बाद नहीं करना
चाहिए और राज्य में व्याप्त अशांति से निपटने के लिए सभी पक्षों के साथ विश्वसनीय
और अर्थपूर्ण राजनीतिक संवाद शुरू कर देना चाहिए। शिष्टमंडल ने कहा कि कश्मीर में
व्याप्त अशांति पर गौर करने में लगातार विफल रहने से अलगाव की भावना और अधिक गहरी
होगी। इसके साथ ही शिष्टमंडल ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस नाजुक स्थिति से
निपटने के लिए तत्काल उपाय करेंगे।
बता दे कि इससे पहले उमर
अब्दुल्ला के नेतृत्व में चार पार्टियां नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, पीडीएफ और लेफ्ट के नेता राष्ट्रपति से भी
मिल चुकी हैं, जबकि रविवार शाम को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल
गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं। इस मुलाकात में कश्मीर घाटी में जारी अशांति और
तनाव की स्थिति को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा हुई।
नई दिल्ली : कश्मीर
में बीते 45 दिन से जारी कर्फ्यू के बीच आज कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर
अब्दुल्ला के नेतृत्व में राज्य के विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जमीनी
परिस्थितियों की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे
घाटी में व्याप्त अशांति से निपटने के लिए राजनीतिक रूख अपनाएं।
उमर के नेतृत्व वाले
शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि कश्मीर में अशांति से निपटने में लगातार
विफल रहने से अलगाव की भावना गहरी होगी। उमर के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने
प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि वे कश्मीर घाटी में सभी पक्षों के साथ तुरंत
बातचीत शुरू करें। जम्मू-कश्मीर के विपक्षी दलों के शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री
मोदी को ज्ञापन सौंपकर राज्य में पैलेट बंदूकों पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग
की।
आपको बता दे कि घाटी
में बीते 45 दिन से कर्फ्यू लगा हुआ है। वहां के मौजूदा हालात के मद्देनजर राज्य
के सभी विपक्षी दल दलगत सीमाओं से परे जाकर एकजुट हुए हैं और उन्होंने केंद्र से
अनुरोध किया है कि वह राज्य में सभी पक्षों के साथ राजनीतिक वार्ता की शुरूआत करे।
उमर के अलावा इस
शिष्टमंडल में प्रदेश कांग्रेस का सात सदस्यीय दल और मुख्य विपक्ष नेशनल कांफ्रेंस
का आठ सदस्यीय दल शामिल है। यह शिष्टमंडल राष्ट्रीय राजधानी में है और सरकार एवं
विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर रहा है। शिष्टमंडल में कांग्रेस दल का नेतृत्व
प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रमुख जी ए मीर कर रहे हैं। नेशनल कांफ्रेंस के दल में
इसके प्रांतीय प्रमुख नसीर वानी और देविंदर राणा भी हैं। इनके अलावा माकपा के
विधायक एम वाई तरीगामी भी इस शिष्टमंडल में शामिल हैं।
आपको बता दे कि शिष्टमंडल
ने घाटी में लोगों की मौतों पर नाराजगी और दुख प्रकट करते हुए और हालात से निपटने
में राजनीतिक रूख के अभाव पर निराशा जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन
सौंपा।
शिष्टमंडल ने
प्रधानमंत्री को बताया कि कश्मीर में राजनीतिक समस्या का निपटान राजनीतिक तरीके से
करने के बजाय पहले भी आजमाए जा चुके प्रशासनिक तरीकों से करने के कारण स्थिति और
अधिक बिगड़ी है और इसके कारण असंतोष और मोहभंग की अभूतपूर्व अनुभूति पैदा हुई है।
यह भावना विशेष तौर पर युवाओं में पनपी है।
ज्ञापन में कहा गया
है कि हमारा यह दृढ़ मत है कि केंद्र सरकार को अब और अधिक समय बर्बाद नहीं करना
चाहिए और राज्य में व्याप्त अशांति से निपटने के लिए सभी पक्षों के साथ विश्वसनीय
और अर्थपूर्ण राजनीतिक संवाद शुरू कर देना चाहिए। शिष्टमंडल ने कहा कि कश्मीर में
व्याप्त अशांति पर गौर करने में लगातार विफल रहने से अलगाव की भावना और अधिक गहरी
होगी। इसके साथ ही शिष्टमंडल ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस नाजुक स्थिति से
निपटने के लिए तत्काल उपाय करेंगे।
बता दे कि इससे पहले उमर
अब्दुल्ला के नेतृत्व में चार पार्टियां नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, पीडीएफ और लेफ्ट के नेता राष्ट्रपति से भी
मिल चुकी हैं, जबकि रविवार शाम को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल
गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं। इस मुलाकात में कश्मीर घाटी में जारी अशांति और
तनाव की स्थिति को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा हुई।
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