नई दिल्ली : प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी भी गोरक्षक रहे हैं। गुजरात में उन्होंने न सिर्फ गोपालन को बढ़ावा
दिया बल्कि खुद भी एक गांव में गोशाला बनवाकर वहां सैकड़ों गायों के रहने का
बंदोबस्त कराया। ये खुलासा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर लिखी गई किताब 'स्पीकिंगः द मोदी वे' के जरिए सामने आया है।
आपको बता दे कि पुस्तक
के लेखकर वीरेंदर कपूर हैं और इसका प्रकाशन रूपा पब्लिकेशन, नई दिल्ली ने किया है। पुस्तक के पेज नंबर 15 पर लेखक वीरेंदर कपूर ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पशु प्रेम का जिक्र किया है और खास तौर पर इस बारे
में बताया है कि गुजरात के सीएम रहते हुए उन्होंने पशुशाला और गोशालाओं को लेकर
बेहतरीन काम किया।
पीएम मोदी ने न सिर्फ
पशुओं के स्वास्थ्य की देख-रेख करने के लिए पशु चिकित्सा मेले शुरू हुए बल्कि
उन्होंने एक इलाके में सड़कों पर भटकने वाली गायों को बड़ी तादाद में इकट्ठा
करवाकर उनके गोशाला में रहने का बंदोबस्त किया।
इसके लिए गुजरात के
अकर्डा गांव में गोशाला बनाई गई और वहां शुरुआती चरण में 1100 गायों को रखकर उनका
सही तरीके से पालन-पोषण सुनिश्चित किया गया। पुस्तक के मुताबिक, नरेंद्र मोदी के इस प्रयास से जहां सड़कों पर गोबर बिखरे रहने की समस्या
खत्म हुई, वहीं गोवंश के गोबर से गैस उत्पादन का काम भी
गोशाला में शुरू हुआ।
Source@AajTak
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी भी गोरक्षक रहे हैं। गुजरात में उन्होंने न सिर्फ गोपालन को बढ़ावा
दिया बल्कि खुद भी एक गांव में गोशाला बनवाकर वहां सैकड़ों गायों के रहने का
बंदोबस्त कराया। ये खुलासा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर लिखी गई किताब 'स्पीकिंगः द मोदी वे' के जरिए सामने आया है।
आपको बता दे कि पुस्तक
के लेखकर वीरेंदर कपूर हैं और इसका प्रकाशन रूपा पब्लिकेशन, नई दिल्ली ने किया है। पुस्तक के पेज नंबर 15 पर लेखक वीरेंदर कपूर ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पशु प्रेम का जिक्र किया है और खास तौर पर इस बारे
में बताया है कि गुजरात के सीएम रहते हुए उन्होंने पशुशाला और गोशालाओं को लेकर
बेहतरीन काम किया।
पीएम मोदी ने न सिर्फ
पशुओं के स्वास्थ्य की देख-रेख करने के लिए पशु चिकित्सा मेले शुरू हुए बल्कि
उन्होंने एक इलाके में सड़कों पर भटकने वाली गायों को बड़ी तादाद में इकट्ठा
करवाकर उनके गोशाला में रहने का बंदोबस्त किया।
इसके लिए गुजरात के
अकर्डा गांव में गोशाला बनाई गई और वहां शुरुआती चरण में 1100 गायों को रखकर उनका
सही तरीके से पालन-पोषण सुनिश्चित किया गया। पुस्तक के मुताबिक, नरेंद्र मोदी के इस प्रयास से जहां सड़कों पर गोबर बिखरे रहने की समस्या
खत्म हुई, वहीं गोवंश के गोबर से गैस उत्पादन का काम भी
गोशाला में शुरू हुआ।
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