नई दिल्ली : वायुसेना
ने करीब दो महीने पहले लापता हुए अपने विमान एएन-32 में सवार सभी 29 कर्मियों को
मृत मान लिया है। और उनके परिजनों को पत्र भेज दिए गए हैं। इसके बाद वायुसेना मृत
मान लिए गए कार्मिकों के परिजनों को पेंशन आदि लाभ देने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
जबकि विमान के मलबे की खोजबीन का अभियान जारी रहेगा। और विमान का अभी कोई पता नही
चल पाया है।
वायुसेना की तरफ से
परिजनों को 24 अगस्त को एक पत्र लिखा गया है जिसमें कहा गया है कि एएन-32 की
खोजबीन के तमाम प्रयास असफल साबित हुए हैं। वायुसेना आगे भी अभियान जारी रखेगी।
वायुसेना ने कहा कि सुलुर एयरफोर्स स्टेशन में कोर्ट ऑफ इंक्वारी ने कहा है कि इन
कार्मिकों को अब मृत मान लिया जाना चाहिए। इसलिए यह निर्णय लिया गया है ताकि आगे
की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो। अब परिजनों को वे सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी
जो एक सैन्यकर्मी या सैन्य अधिकारी की मृत्यु होने पर दी जाती हैं।
वायुसेना ने कहा कि
विमान के मलबे की खोजबीन का अभियान जारी रहेगा। इस कार्य में वायुसेना के अलावा
नौसेना,कोस्ट गार्ड, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओसियन टेक्नोलॉजी
के करीब दो दर्जन पोत एवं वायुयान जुटे हुए हैं। अब तक समुद्र में 217800 वर्ग
समुद्री मील क्षेत्र में खोजबीन की जा चुकी है।
वायुसेना के अधिकारी
के मुताबिक इधर कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिससे खोजबीन अभियान को कुछ खास स्थानों पर
केंद्रीत किया गया है। समुद्र में इन जगहों पर गहन पड़ताल की जा रही है। यह पूछने
पर कि यह अभियान कब तक रहेगा ? अधिकारी ने कहा कि यह
अभी जारी रहेगा। अवधि बताना मुश्किल है लेकिन आगे वायुसेना तय करेगा कि क्या कदम
उठाए जाने हैं।
अमेरिकी उपग्रह का
इस्तेमाल-वायुसेना के अनुसार विमान की तलाश में इंटरनेशनल इमरजेंसी रिस्पांस टीम
की भी मदद ली गई। साथ ही अमेरिका के उपग्रहों के मदद से समुद्र को भी खंगाला जा
चुका है। लेकिन विमान की कोई खोज-खबर नहीं लगी।
22 जुलाई को हुआ था
लापता-यह विमान 22 जुलाई को लापता हुआ था। विमान ने चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर के लिए
उड़ान भरी थी लेकिन कुछ ही देर के बाद इसका संपर्क कट गया था। उसके बाद से ही इसकी
खोजबीन का अभियान जारी है। दरअसल यह विमान खराब हुआ था जिसकी मरम्मत के बाद उसे
उड़ाया जा रहा था।
नई दिल्ली : वायुसेना
ने करीब दो महीने पहले लापता हुए अपने विमान एएन-32 में सवार सभी 29 कर्मियों को
मृत मान लिया है। और उनके परिजनों को पत्र भेज दिए गए हैं। इसके बाद वायुसेना मृत
मान लिए गए कार्मिकों के परिजनों को पेंशन आदि लाभ देने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
जबकि विमान के मलबे की खोजबीन का अभियान जारी रहेगा। और विमान का अभी कोई पता नही
चल पाया है।
वायुसेना की तरफ से
परिजनों को 24 अगस्त को एक पत्र लिखा गया है जिसमें कहा गया है कि एएन-32 की
खोजबीन के तमाम प्रयास असफल साबित हुए हैं। वायुसेना आगे भी अभियान जारी रखेगी।
वायुसेना ने कहा कि सुलुर एयरफोर्स स्टेशन में कोर्ट ऑफ इंक्वारी ने कहा है कि इन
कार्मिकों को अब मृत मान लिया जाना चाहिए। इसलिए यह निर्णय लिया गया है ताकि आगे
की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो। अब परिजनों को वे सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी
जो एक सैन्यकर्मी या सैन्य अधिकारी की मृत्यु होने पर दी जाती हैं।
वायुसेना ने कहा कि
विमान के मलबे की खोजबीन का अभियान जारी रहेगा। इस कार्य में वायुसेना के अलावा
नौसेना,कोस्ट गार्ड, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओसियन टेक्नोलॉजी
के करीब दो दर्जन पोत एवं वायुयान जुटे हुए हैं। अब तक समुद्र में 217800 वर्ग
समुद्री मील क्षेत्र में खोजबीन की जा चुकी है।
वायुसेना के अधिकारी
के मुताबिक इधर कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिससे खोजबीन अभियान को कुछ खास स्थानों पर
केंद्रीत किया गया है। समुद्र में इन जगहों पर गहन पड़ताल की जा रही है। यह पूछने
पर कि यह अभियान कब तक रहेगा ? अधिकारी ने कहा कि यह
अभी जारी रहेगा। अवधि बताना मुश्किल है लेकिन आगे वायुसेना तय करेगा कि क्या कदम
उठाए जाने हैं।
अमेरिकी उपग्रह का
इस्तेमाल-वायुसेना के अनुसार विमान की तलाश में इंटरनेशनल इमरजेंसी रिस्पांस टीम
की भी मदद ली गई। साथ ही अमेरिका के उपग्रहों के मदद से समुद्र को भी खंगाला जा
चुका है। लेकिन विमान की कोई खोज-खबर नहीं लगी।
22 जुलाई को हुआ था
लापता-यह विमान 22 जुलाई को लापता हुआ था। विमान ने चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर के लिए
उड़ान भरी थी लेकिन कुछ ही देर के बाद इसका संपर्क कट गया था। उसके बाद से ही इसकी
खोजबीन का अभियान जारी है। दरअसल यह विमान खराब हुआ था जिसकी मरम्मत के बाद उसे
उड़ाया जा रहा था।
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