नई दिल्ली : सामुद्रिक
निरीक्षण के लिए भारत की ओर से अमेरिका के साथ किए गए गार्जियन ड्रोन सौदे पर
अमेरिका सकारात्मक रूख अपना सकता है। गार्जियन ड्रोन हिंद महासागर की निगरानी के
लिए होंगे। जून में अमेरिका ने भारत को अपना एक बड़े रक्षा साझेदार का दर्जा दिया
था,
इसके बाद यह कदम उठाया गया है। भारत को अपना बड़ा रक्षा सहयोगी का
दर्जा देने के कुछ ही हफ्तों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका जाकर
व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की थी।
इससे पहले फरवरी में
भारतीय नौसेना ने अमेरिकी रक्षा विभाग को उच्च तकनीकी क्षमता से लैस 22 मल्टी मिशन
प्रेडेटर गार्जियन यूएवी की खरीद के लिए एक अनुरोध पत्र (एलओआर) भेजा था।
आपको बता दे कि सरकार
के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक समुद्रिक निगरानी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए
गार्जियन यूएवी की जरूरत को लेकर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी रक्षा
मंत्री एश्टन कार्टर के बीच बातचीत हो चुकी है। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात 29
अगस्त को पेंटागन में हुई थी।
इस डील से भारत की
सामुद्रिक रक्षा शक्ति को बल मिलेगा। इसकी कुल लागत 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। एक
ओर जहां इस डील को लेकर भारत में उत्साह है वहीं पाकिस्तान की चिताएं बढ़ गई हैं
और उसे इस बात का डर सताने लगा है कि भारत इसका इसके इस्तेमाल उसके खिलाफ कर सकता
है।
आपको बता दे कि गार्जियन
ड्रोन एक मानवरहित वायुयान है। इसे अमेरिका ने इसे खासतौर पर अपनी एयर फोर्स के
लिए तैयार किया है। खासतौर पर लंबी दूरी तय करने, अधिक
ऊंचाई पर उड़ान भरने और निगरानी के लिए बनाए गए इस विमान को रिमोट से कंट्रोल किया
जा सकता है।
नई दिल्ली : सामुद्रिक
निरीक्षण के लिए भारत की ओर से अमेरिका के साथ किए गए गार्जियन ड्रोन सौदे पर
अमेरिका सकारात्मक रूख अपना सकता है। गार्जियन ड्रोन हिंद महासागर की निगरानी के
लिए होंगे। जून में अमेरिका ने भारत को अपना एक बड़े रक्षा साझेदार का दर्जा दिया
था,
इसके बाद यह कदम उठाया गया है। भारत को अपना बड़ा रक्षा सहयोगी का
दर्जा देने के कुछ ही हफ्तों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका जाकर
व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की थी।
इससे पहले फरवरी में
भारतीय नौसेना ने अमेरिकी रक्षा विभाग को उच्च तकनीकी क्षमता से लैस 22 मल्टी मिशन
प्रेडेटर गार्जियन यूएवी की खरीद के लिए एक अनुरोध पत्र (एलओआर) भेजा था।
आपको बता दे कि सरकार
के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक समुद्रिक निगरानी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए
गार्जियन यूएवी की जरूरत को लेकर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी रक्षा
मंत्री एश्टन कार्टर के बीच बातचीत हो चुकी है। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात 29
अगस्त को पेंटागन में हुई थी।
इस डील से भारत की
सामुद्रिक रक्षा शक्ति को बल मिलेगा। इसकी कुल लागत 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। एक
ओर जहां इस डील को लेकर भारत में उत्साह है वहीं पाकिस्तान की चिताएं बढ़ गई हैं
और उसे इस बात का डर सताने लगा है कि भारत इसका इसके इस्तेमाल उसके खिलाफ कर सकता
है।
आपको बता दे कि गार्जियन
ड्रोन एक मानवरहित वायुयान है। इसे अमेरिका ने इसे खासतौर पर अपनी एयर फोर्स के
लिए तैयार किया है। खासतौर पर लंबी दूरी तय करने, अधिक
ऊंचाई पर उड़ान भरने और निगरानी के लिए बनाए गए इस विमान को रिमोट से कंट्रोल किया
जा सकता है।
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