नई दिल्ली : दीपा
मलिक ने पैरालिंपिक के शॉटपुट इवेंट में देश के लिए सिल्वर जीतकर इतिहास रचा है। बता
दे कि पैरालिंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। वह न सिर्फ
पैरालिंपिक में भाग लेने वाली भारत की पहली महिला एथलीट हैं बल्कि सिल्वर मेडल
जीतकर इतिहास में अपना नाम दर्ज किया है। इससे पहले भारत को ऊंचीकूद में मयप्पन
थांगावेलू को गोल्ड मेडल और वरुण भाटी को कांस्य पदक मिल चुका है। अब तक भारत के
पदक तालिका में तीन पदक हो गए हैं।
शॉटपुट में दीपा मलिक
ने छठे प्रयास में 4.61 का स्कोर बनाकर दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि पहले स्थान पर बहरीन की फातिमा नेधाम (4.76) और तीसरे स्थान पर ग्रीस
की दिमित्रा कोरोकिदा (4.28) रहीं।
आपको बता दे कि 1999
में दीपा मलिक को स्पाइनल ट्यूमर था, जिसकी वजह
से तीन बार सर्जरी हुई और कंधे पर 183 टांके लगे। जिसके बाद वह कमर के नीचे
लकवाग्रस्त हो गईं थी। ऐसे में अपने हौसले की उड़ान भरने में वह बिल्कुल नहीं
रुकीं और स्पोर्ट्स में अपनी रुचि लगातार बनाए रखी। अपने सपनों को पूरा करने के
लिए उन्होंने व्हीलचेयर पर प्रैक्टिस करती थीं।
नई दिल्ली : दीपा
मलिक ने पैरालिंपिक के शॉटपुट इवेंट में देश के लिए सिल्वर जीतकर इतिहास रचा है। बता
दे कि पैरालिंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। वह न सिर्फ
पैरालिंपिक में भाग लेने वाली भारत की पहली महिला एथलीट हैं बल्कि सिल्वर मेडल
जीतकर इतिहास में अपना नाम दर्ज किया है। इससे पहले भारत को ऊंचीकूद में मयप्पन
थांगावेलू को गोल्ड मेडल और वरुण भाटी को कांस्य पदक मिल चुका है। अब तक भारत के
पदक तालिका में तीन पदक हो गए हैं।
शॉटपुट में दीपा मलिक
ने छठे प्रयास में 4.61 का स्कोर बनाकर दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि पहले स्थान पर बहरीन की फातिमा नेधाम (4.76) और तीसरे स्थान पर ग्रीस
की दिमित्रा कोरोकिदा (4.28) रहीं।
आपको बता दे कि 1999
में दीपा मलिक को स्पाइनल ट्यूमर था, जिसकी वजह
से तीन बार सर्जरी हुई और कंधे पर 183 टांके लगे। जिसके बाद वह कमर के नीचे
लकवाग्रस्त हो गईं थी। ऐसे में अपने हौसले की उड़ान भरने में वह बिल्कुल नहीं
रुकीं और स्पोर्ट्स में अपनी रुचि लगातार बनाए रखी। अपने सपनों को पूरा करने के
लिए उन्होंने व्हीलचेयर पर प्रैक्टिस करती थीं।
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