नई दिल्ली : उरी हमले
के बाद भारत पाकिस्तान में तनाव बढ़ता जा रहा है। अब भारत, पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर एक और झटका दे सकता है। उसे दिए गए मोस्ट
फेवर्ड नेशन के दर्जे को खत्म किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी
समीक्षा के लिए आज एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
(एनएसए) अजित डोवाल के अलावा विदेश मंत्रालय और कंपनी मामलों के मंत्रालय के
वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
आपको बता दे कि उरी
हमले के बाद से ही देश में लगातार पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग हो रही है।
सरकार ने सिंधु समझौते को तो नहीं तोड़ा, लेकिन वह
उसे दिया गया मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस छीन सकती है। इस फैसले से पाकिस्तान
की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा। बता दें कि भारत ने 1996 में
पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया था। इससे पहले भारत ने सार्क
सम्मेलन में जाने से भी मना कर दिया था जिसकी वजह से सम्मेलन रद्द कर दिया है।
वर्ल्ड ट्रेड
ऑर्गेनाइजेशन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों को लेकर एमएफए स्टेट्स दिया जाता है।
एमएफएन स्टेट्स दिए जाने पर दूसरे देश इस बात को लेकर आश्वस्त रहता है कि उसे
व्यापार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। इसकी वजह से पाकिस्तान को अधिक आयात कोटा
और कम ट्रेड टैरिफ मिलता है।
हालांकि, बदले में पाकिस्तान ने आश्वासन के बावजूद भारत को एमएफएन दर्जा नहीं दिया।
उधर भारत की कोशिशों के चलते सार्क देशों के बीच पाकिस्तान पहले ही अकेला पड़ चुका
है। भारत के साथ साथ अफगानिस्तान, भूटान, और बांग्लादेश ने नेपाल को सम्मेलन के बहिष्कार की खबर दे दी है।
इस वक्त सार्क देशों
की अध्यक्षता कर रहे नेपाल ने अपने बयान में माना है कि उसे बहिष्कार की सूचना मिल
चुकी है। फिलहाल उसने औपचारिक तौर पर सभी देशों से गुजारिश की है कि सम्मेलन लायक
माहौल बनाया जाए। गौरतलब है कि सार्क सम्मेलन इस्लामाबाद में 9 और 10 नवंबर को
होने वाला था।
नई दिल्ली : उरी हमले
के बाद भारत पाकिस्तान में तनाव बढ़ता जा रहा है। अब भारत, पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर एक और झटका दे सकता है। उसे दिए गए मोस्ट
फेवर्ड नेशन के दर्जे को खत्म किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी
समीक्षा के लिए आज एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
(एनएसए) अजित डोवाल के अलावा विदेश मंत्रालय और कंपनी मामलों के मंत्रालय के
वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
आपको बता दे कि उरी
हमले के बाद से ही देश में लगातार पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग हो रही है।
सरकार ने सिंधु समझौते को तो नहीं तोड़ा, लेकिन वह
उसे दिया गया मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस छीन सकती है। इस फैसले से पाकिस्तान
की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा। बता दें कि भारत ने 1996 में
पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया था। इससे पहले भारत ने सार्क
सम्मेलन में जाने से भी मना कर दिया था जिसकी वजह से सम्मेलन रद्द कर दिया है।
वर्ल्ड ट्रेड
ऑर्गेनाइजेशन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों को लेकर एमएफए स्टेट्स दिया जाता है।
एमएफएन स्टेट्स दिए जाने पर दूसरे देश इस बात को लेकर आश्वस्त रहता है कि उसे
व्यापार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। इसकी वजह से पाकिस्तान को अधिक आयात कोटा
और कम ट्रेड टैरिफ मिलता है।
हालांकि, बदले में पाकिस्तान ने आश्वासन के बावजूद भारत को एमएफएन दर्जा नहीं दिया।
उधर भारत की कोशिशों के चलते सार्क देशों के बीच पाकिस्तान पहले ही अकेला पड़ चुका
है। भारत के साथ साथ अफगानिस्तान, भूटान, और बांग्लादेश ने नेपाल को सम्मेलन के बहिष्कार की खबर दे दी है।
इस वक्त सार्क देशों
की अध्यक्षता कर रहे नेपाल ने अपने बयान में माना है कि उसे बहिष्कार की सूचना मिल
चुकी है। फिलहाल उसने औपचारिक तौर पर सभी देशों से गुजारिश की है कि सम्मेलन लायक
माहौल बनाया जाए। गौरतलब है कि सार्क सम्मेलन इस्लामाबाद में 9 और 10 नवंबर को
होने वाला था।
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