नई दिल्ली : वायुसेना
प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने गुरुवार को कश्मीर मुद्दे पर स्पष्ट राय रखी।
एक सेमिनार में उन्होंने कहा कि उच्च नैतिक आदर्शों पर चलने की बजाय अगर हमने सेना
का इस्तेमाल किया होता तो आज पीओके(POK) हमारा होता।
एयर चीफ मार्शल ने
कहा कि कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा हमारे शरीर में कांटे की तरह
चुभा हुआ है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हमारी विदेश नीति संयुक्त राष्ट्र के
चार्टर,
गुट निरपेक्ष आंदोलन और पंचशील सिद्धांतों से बंधी हुई है और भारत
ने अपनी सुरक्षा जरूरतों को लेकर व्यावहारिक सोच को नहीं अपनाया। राहा की यह
टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पीओके और बलूचिस्तान पर आक्रामक रुख के बाद
सामने आई है।
राहा ने कहा कि 1947
में कश्मीर पर कबायलियों के हमले से निपटने में वायु सेना की परिवहन शाखा ने सैनिक
और रसद पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सेना ने हमलावरों को रोक दिया।
उस वक्त जब सैन्य ताकत इस्तेमाल की जानी थी, लेकिन इस
मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हम नैतिक मूल्यों के आधार पर संयुक्त राष्ट्र
गए और यह समस्या अभी भी बनी हुई है।
वायुसेना प्रमुख ने
बताया कि मुठभेड़ की आशंका को लेकर 1962 के युद्ध में भी हवाई ताकत का पूरा
इस्तेमाल नहीं किया गया। वर्ष 1965 के युद्ध में भी राजनीतिक कारणों से हमने
पूर्वी पाकिस्तान में हवाई ताकत का उपयोग नहीं किया। जबकि पाकिस्तानी वायुसेना
वहां से हमारे हवाई ठिकानों पर हमले कर रही थी। लेकिन हमने जवाबी कार्रवाई नहीं
की।
राहा ने कहा कि सिर्फ
1971 के भारत-पाक युद्ध में हमने हवाई ताकत की पूरी ताकत झोंकी। तीनों सेनाओं की
साझा कार्रवाई का नतीजा था कि बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
लेकिन अब माहौल बदल
गया है। हम संघर्ष से निपटने और अपनी रक्षा करने के लिए हवाई शक्ति का प्रयोग करने
को तैयार हैं।
आगे राहा ने कहा कि
भारत के सुरक्षा वातावरण को खराब करने का प्रयास किया जाता है। लिहाजा क्षेत्र में
संघर्ष से निपटने और शांति-स्थिरता कायम करने के लिए मजबूत हवाई ताकत की जरूरत है।
सकारात्मक माहौल कायम रखने में हम सैन्य शक्ति की भूमिका को नजर अंदाज नहीं कर
सकते।
आपको बता दे कि मेक
इन इंडिया पर बल देते हुए राहा ने कहा कि स्वदेशी एचटीटी 40 बेसिक प्रशिक्षण
विमानों को बड़ी संख्या में वायुसेना में शामिल किया जाएगा, जिससे घरेलू क्षमता में इजाफा होगा। हालांकि वायुसेना पहले स्विट्जरलैंड
के विमान लेने को इच्छुक थी।
रक्षा सूत्रों का
कहना है कि वायुसेना कम से कम 70 ऐसे विमानों को खरीदने को प्रतिबद्ध है।
हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 (एचटीटी-40) ने काफी विलंब के बाद 31 मई को अपनी पहली
उड़ान भरी थी। इस विमान का उपयोग तीनों सेनाओं के सभी फ्लाइंग कैडेट को पहले चरण का
प्रशिक्षण देने में किया जाएगा।
नई दिल्ली : वायुसेना
प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने गुरुवार को कश्मीर मुद्दे पर स्पष्ट राय रखी।
एक सेमिनार में उन्होंने कहा कि उच्च नैतिक आदर्शों पर चलने की बजाय अगर हमने सेना
का इस्तेमाल किया होता तो आज पीओके(POK) हमारा होता।
एयर चीफ मार्शल ने
कहा कि कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा हमारे शरीर में कांटे की तरह
चुभा हुआ है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हमारी विदेश नीति संयुक्त राष्ट्र के
चार्टर,
गुट निरपेक्ष आंदोलन और पंचशील सिद्धांतों से बंधी हुई है और भारत
ने अपनी सुरक्षा जरूरतों को लेकर व्यावहारिक सोच को नहीं अपनाया। राहा की यह
टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पीओके और बलूचिस्तान पर आक्रामक रुख के बाद
सामने आई है।
राहा ने कहा कि 1947
में कश्मीर पर कबायलियों के हमले से निपटने में वायु सेना की परिवहन शाखा ने सैनिक
और रसद पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सेना ने हमलावरों को रोक दिया।
उस वक्त जब सैन्य ताकत इस्तेमाल की जानी थी, लेकिन इस
मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हम नैतिक मूल्यों के आधार पर संयुक्त राष्ट्र
गए और यह समस्या अभी भी बनी हुई है।
वायुसेना प्रमुख ने
बताया कि मुठभेड़ की आशंका को लेकर 1962 के युद्ध में भी हवाई ताकत का पूरा
इस्तेमाल नहीं किया गया। वर्ष 1965 के युद्ध में भी राजनीतिक कारणों से हमने
पूर्वी पाकिस्तान में हवाई ताकत का उपयोग नहीं किया। जबकि पाकिस्तानी वायुसेना
वहां से हमारे हवाई ठिकानों पर हमले कर रही थी। लेकिन हमने जवाबी कार्रवाई नहीं
की।
राहा ने कहा कि सिर्फ
1971 के भारत-पाक युद्ध में हमने हवाई ताकत की पूरी ताकत झोंकी। तीनों सेनाओं की
साझा कार्रवाई का नतीजा था कि बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
लेकिन अब माहौल बदल
गया है। हम संघर्ष से निपटने और अपनी रक्षा करने के लिए हवाई शक्ति का प्रयोग करने
को तैयार हैं।
आगे राहा ने कहा कि
भारत के सुरक्षा वातावरण को खराब करने का प्रयास किया जाता है। लिहाजा क्षेत्र में
संघर्ष से निपटने और शांति-स्थिरता कायम करने के लिए मजबूत हवाई ताकत की जरूरत है।
सकारात्मक माहौल कायम रखने में हम सैन्य शक्ति की भूमिका को नजर अंदाज नहीं कर
सकते।
आपको बता दे कि मेक
इन इंडिया पर बल देते हुए राहा ने कहा कि स्वदेशी एचटीटी 40 बेसिक प्रशिक्षण
विमानों को बड़ी संख्या में वायुसेना में शामिल किया जाएगा, जिससे घरेलू क्षमता में इजाफा होगा। हालांकि वायुसेना पहले स्विट्जरलैंड
के विमान लेने को इच्छुक थी।
रक्षा सूत्रों का
कहना है कि वायुसेना कम से कम 70 ऐसे विमानों को खरीदने को प्रतिबद्ध है।
हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 (एचटीटी-40) ने काफी विलंब के बाद 31 मई को अपनी पहली
उड़ान भरी थी। इस विमान का उपयोग तीनों सेनाओं के सभी फ्लाइंग कैडेट को पहले चरण का
प्रशिक्षण देने में किया जाएगा।
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