Friday, 2 September 2016

ट्रेड यूनियनों की आज राष्‍ट्रव्‍यापी हड़ताल, 15 करोड़ श्रमिकों के शामिल होने का दावा!

Dainik Times     10:11    
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नई दिल्ली : देश के प्रमुख केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने कहा है कि दो सितंबर को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल पिछले साल की तुलना में बड़ी होगी। उनका कहना है कि सरकार ने उनकी 12 सूत्री मांगों पर ध्यान नहीं दिया है और सरकार एकतरफा तरीके से श्रम सुधार लागू कर रही है। केंद्रीय संगठनों ने दावा किया है कि इस साल हड़ताल में करीब 15 करोड़ श्रमिक शामिल होंगे।
trade-union-announces-nationwide-strike-today

आपको बता दे कि बैकिंग, टेलीकॉम और कई अन्‍य क्षेत्रों के कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहेंगे। यह कर्मचारी बेहतर वेतन के साथ सरकार की नई श्रमिक और निवेश नीतियों के विरोध में यह कदम उठा रहे हैं। बैंक, सरकारी ऑफिस और फैक्‍टरियां बंद रहेंगी।

कुछ राज्‍यों में स्‍थानीय संगठनों ने भी हड़ताल में भागीदारी का फैसला किया है। इसके कारण सार्वजनिक परिवहन व्‍यवस्‍था पर भी असर पड़ सकता है। इनके साथ-साथ रेडियोलॉजिस्‍टों और सरकारी अस्‍पतालों की नर्सों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है।

आल इंडिया ट्रेड यूनियंस कांग्रेस और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस जैसे संगठनों ने हड़ताल नहीं करने की सरकार की अपील को ठुकरा दिया था। इन संगठनों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में नाकाम रही है। इन संगठनों की आपत्ति बीमा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों के शिथिल करने को लेकर है। घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने की योजना का भी श्रमिक संगठन विरोध कर रहे हैं।


ट्रेड यूनियनों की हड़ताल को खत्‍म करने के प्रयासों के तहत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा था कि सरकार अपने कर्मचारियों का पिछले दो साल का बोनस जारी करेगी। इसके साथ अकुशल श्रमिकों के न्‍यूनतम वेतन में इजाफे की बात भी कही गई है।
नई दिल्ली : देश के प्रमुख केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने कहा है कि दो सितंबर को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल पिछले साल की तुलना में बड़ी होगी। उनका कहना है कि सरकार ने उनकी 12 सूत्री मांगों पर ध्यान नहीं दिया है और सरकार एकतरफा तरीके से श्रम सुधार लागू कर रही है। केंद्रीय संगठनों ने दावा किया है कि इस साल हड़ताल में करीब 15 करोड़ श्रमिक शामिल होंगे।
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आपको बता दे कि बैकिंग, टेलीकॉम और कई अन्‍य क्षेत्रों के कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहेंगे। यह कर्मचारी बेहतर वेतन के साथ सरकार की नई श्रमिक और निवेश नीतियों के विरोध में यह कदम उठा रहे हैं। बैंक, सरकारी ऑफिस और फैक्‍टरियां बंद रहेंगी।

कुछ राज्‍यों में स्‍थानीय संगठनों ने भी हड़ताल में भागीदारी का फैसला किया है। इसके कारण सार्वजनिक परिवहन व्‍यवस्‍था पर भी असर पड़ सकता है। इनके साथ-साथ रेडियोलॉजिस्‍टों और सरकारी अस्‍पतालों की नर्सों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है।

आल इंडिया ट्रेड यूनियंस कांग्रेस और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस जैसे संगठनों ने हड़ताल नहीं करने की सरकार की अपील को ठुकरा दिया था। इन संगठनों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में नाकाम रही है। इन संगठनों की आपत्ति बीमा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों के शिथिल करने को लेकर है। घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने की योजना का भी श्रमिक संगठन विरोध कर रहे हैं।


ट्रेड यूनियनों की हड़ताल को खत्‍म करने के प्रयासों के तहत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा था कि सरकार अपने कर्मचारियों का पिछले दो साल का बोनस जारी करेगी। इसके साथ अकुशल श्रमिकों के न्‍यूनतम वेतन में इजाफे की बात भी कही गई है।
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