नई दिल्ली : टाटा
उद्योग समूह के चेयरमैन पद से अचानक हटाये जाने से दुखी साइरस मिस्त्री ने रतन
टाटा के खिलाफ कई आरोप लगाते हुए चौकाने वाले खुलासे किये हैं। मिस्त्री ने कहा है
कि कंपनी में उन्हें ‘एक निरीह चेयरमैन’ की स्थिति में ढकेल दिया गया था। यानि वो सिर्फ नाम के ही चेयरमैन थे। एक
गोपनीय मेल में मिस्त्री ने टाटा नैनो कार
को भी लेकर कई अहम खुलासे किए हैं।
टाटा और अपने बीच
बेहतर संबंध नहीं होने का स्पष्ट संकेत देते हुए उन्होंने अपने ईमेल में रतन टाटा
द्वारा शुरू की गई घाटे वाली नैनो कार परियोजना का मुद्दा भी उठाया है। उन्हेंने
कहा है कि इसे भावनात्मक कारणों से बंद नहीं किया जा सका। एक कारण यह भी था कि इसे
बंद करने से बिजली की कार बनाने वाली एक इकाई को ‘सूक्ष्म
ग्लाइडर’ की आपूर्ति बंद हो जाती।
उस इकाई में टाटा की
हिस्सेदारी है। मिस्त्री ने आरोप लगाया है कि यह रतन टाटा ही थे जिन्होंने समूह को
विमानन क्षेत्र में कदम रखने को मजबूर किया था और उनके लिए (मिस्त्री के लिए) एयर
एशिया और सिंगापुर एयरलाइंस के साथ हाथ मिलाना एक औपचारिकता मात्र बची थी।
साइरस मिस्त्री ने
टाटा समूह पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। उन्होंने मेल में कहा कि निर्णय प्रक्रिया
में बदलाव से टाटा समूह में कई वैकल्पिक शक्ति केंद्र बन गए थे। इतना ही नहीं
मिस्त्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का कोई मौका दिए बिना ही
भारत के सबसे बडे औद्योगिक समूह के चेयरमैन पद से हटा दिया गया। मिस्त्री का कहना
है कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई ‘चटपट अंदाज’ में की गई। उन्हेंने इसे कॉर्पोरेट जगत के इतिहास की अनूठी घटना बताया।
नई दिल्ली : टाटा
उद्योग समूह के चेयरमैन पद से अचानक हटाये जाने से दुखी साइरस मिस्त्री ने रतन
टाटा के खिलाफ कई आरोप लगाते हुए चौकाने वाले खुलासे किये हैं। मिस्त्री ने कहा है
कि कंपनी में उन्हें ‘एक निरीह चेयरमैन’ की स्थिति में ढकेल दिया गया था। यानि वो सिर्फ नाम के ही चेयरमैन थे। एक
गोपनीय मेल में मिस्त्री ने टाटा नैनो कार
को भी लेकर कई अहम खुलासे किए हैं।
टाटा और अपने बीच
बेहतर संबंध नहीं होने का स्पष्ट संकेत देते हुए उन्होंने अपने ईमेल में रतन टाटा
द्वारा शुरू की गई घाटे वाली नैनो कार परियोजना का मुद्दा भी उठाया है। उन्हेंने
कहा है कि इसे भावनात्मक कारणों से बंद नहीं किया जा सका। एक कारण यह भी था कि इसे
बंद करने से बिजली की कार बनाने वाली एक इकाई को ‘सूक्ष्म
ग्लाइडर’ की आपूर्ति बंद हो जाती।
उस इकाई में टाटा की
हिस्सेदारी है। मिस्त्री ने आरोप लगाया है कि यह रतन टाटा ही थे जिन्होंने समूह को
विमानन क्षेत्र में कदम रखने को मजबूर किया था और उनके लिए (मिस्त्री के लिए) एयर
एशिया और सिंगापुर एयरलाइंस के साथ हाथ मिलाना एक औपचारिकता मात्र बची थी।
साइरस मिस्त्री ने
टाटा समूह पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। उन्होंने मेल में कहा कि निर्णय प्रक्रिया
में बदलाव से टाटा समूह में कई वैकल्पिक शक्ति केंद्र बन गए थे। इतना ही नहीं
मिस्त्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का कोई मौका दिए बिना ही
भारत के सबसे बडे औद्योगिक समूह के चेयरमैन पद से हटा दिया गया। मिस्त्री का कहना
है कि उनके खिलाफ यह कार्रवाई ‘चटपट अंदाज’ में की गई। उन्हेंने इसे कॉर्पोरेट जगत के इतिहास की अनूठी घटना बताया।
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