Monday, 24 October 2016

ट्रिपल तलाक पर बोले पीएम मोदी, कहा- मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाना सरकार का कर्तव्य है!

Dainik Times     19:32    
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नई दिल्ली : पीएम मोदी ने महोबा की अपनी रैली में कन्या भ्रूण हत्या और ट्रिपल तलाक मुद्दा भी उठाया। ट्रिपल तलाक का मुद्दा उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ट्रिपल तलाक के मुद्दे को सत्ता पक्ष या विपक्ष का मुद्दा नहीं बनाएं। उन्होंने कहा कि क्या कोई सिर्फ तीन बार तलाक बोल दे वो भी फोन पर तो तलाक हो जाएगा? पीएम मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान की मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाना सरकार का कर्तव्य है। ऐसे में इस मुद्दे को सियासत से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
pm-modi-says-on-tripal-talaq-muslim-women

आपको बता दें ट्रिपल तलाक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यूनीफॉर्म सिविल कोड और तीन तलाक खत्म करने का विरोध किया है। बोर्ड का कहना है कि देश में कई धर्म हैं। ऐसे में यूनीफॉर्म सिविल कोड देश के लिए सही नहीं है।

तीन तलाक के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि वो समान नागरिक संहिता पर क्या सोचती है? इसके बाद इस साल एक जुलाई को कानून मंत्रालय ने लॉ कमीशन से इस मामले में रिपोर्ट देने को कहा था। लॉ कमीशन ने इस मामले में लोगों से विचार मांगे हैं। केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर जवाब देना है। इन्हीं सवालों ने मुस्लिम संगठनों को नाराज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने हलफनामे में कहा है कि तीन तलाक गैर संवैधानिक है। उसका कहना है कि इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन हो रहा है। सरकार सभी धर्मों के लिए एक कानून के पक्ष में है।

पूछे गये सवाल :-

1- क्या आप जानते हैं संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता की बात है और क्या आप चाहते हैं ये सब पर लागू हो ?

2- क्या पर्सनल लॉ महिलाओं के लिए असमानता की स्थिति बनाते हैं?

5- तीन तलाक और बहुविवाह बंद किए जाएं, रहने दिया जाए या इनमें सुधार किया जाए!

6- ईसाइयों में तलाक के लिए 2 साल इंतज़ार का नियम क्या ईसाई महिलाओं के लिए भेदभाव भरा है?

पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक को संवैधानिक मानता है। मुस्लिम संगठनों ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला दिया है। इनमें अपने धर्म और उससे जुड़ी परंपराओं को मानने की आज़ादी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के तीन तलाक को असंवैधानिक बताया था। दशहरे पर भी मोदी ने सभी धर्मों की बेटियों को समान हक देने की बात कही थी। मुस्लिमों में तीन बार तलाक कहकर तलाक लेने के चलन पर बरसों से बहस छिड़ी हुई है, और अब इस पर फैसला सुप्रीम कोर्ट को लेना है।


हिंदू महिलाओं को लेकर भी पूछा गया है कि अक्सर परंपरा के नाम पर उन्हें संपत्ति के बंटवारे में हिस्सा नहीं मिलता। संपत्ति में हिन्दू महिलाओं को हिस्सा दिलाने के लिए किस तरह के प्रावधान किए जाएं?
नई दिल्ली : पीएम मोदी ने महोबा की अपनी रैली में कन्या भ्रूण हत्या और ट्रिपल तलाक मुद्दा भी उठाया। ट्रिपल तलाक का मुद्दा उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ट्रिपल तलाक के मुद्दे को सत्ता पक्ष या विपक्ष का मुद्दा नहीं बनाएं। उन्होंने कहा कि क्या कोई सिर्फ तीन बार तलाक बोल दे वो भी फोन पर तो तलाक हो जाएगा? पीएम मोदी ने कहा कि हिंदुस्तान की मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाना सरकार का कर्तव्य है। ऐसे में इस मुद्दे को सियासत से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
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आपको बता दें ट्रिपल तलाक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यूनीफॉर्म सिविल कोड और तीन तलाक खत्म करने का विरोध किया है। बोर्ड का कहना है कि देश में कई धर्म हैं। ऐसे में यूनीफॉर्म सिविल कोड देश के लिए सही नहीं है।

तीन तलाक के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि वो समान नागरिक संहिता पर क्या सोचती है? इसके बाद इस साल एक जुलाई को कानून मंत्रालय ने लॉ कमीशन से इस मामले में रिपोर्ट देने को कहा था। लॉ कमीशन ने इस मामले में लोगों से विचार मांगे हैं। केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर जवाब देना है। इन्हीं सवालों ने मुस्लिम संगठनों को नाराज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने हलफनामे में कहा है कि तीन तलाक गैर संवैधानिक है। उसका कहना है कि इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन हो रहा है। सरकार सभी धर्मों के लिए एक कानून के पक्ष में है।

पूछे गये सवाल :-

1- क्या आप जानते हैं संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता की बात है और क्या आप चाहते हैं ये सब पर लागू हो ?

2- क्या पर्सनल लॉ महिलाओं के लिए असमानता की स्थिति बनाते हैं?

5- तीन तलाक और बहुविवाह बंद किए जाएं, रहने दिया जाए या इनमें सुधार किया जाए!

6- ईसाइयों में तलाक के लिए 2 साल इंतज़ार का नियम क्या ईसाई महिलाओं के लिए भेदभाव भरा है?

पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक को संवैधानिक मानता है। मुस्लिम संगठनों ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला दिया है। इनमें अपने धर्म और उससे जुड़ी परंपराओं को मानने की आज़ादी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने मुस्लिम समुदाय के तीन तलाक को असंवैधानिक बताया था। दशहरे पर भी मोदी ने सभी धर्मों की बेटियों को समान हक देने की बात कही थी। मुस्लिमों में तीन बार तलाक कहकर तलाक लेने के चलन पर बरसों से बहस छिड़ी हुई है, और अब इस पर फैसला सुप्रीम कोर्ट को लेना है।


हिंदू महिलाओं को लेकर भी पूछा गया है कि अक्सर परंपरा के नाम पर उन्हें संपत्ति के बंटवारे में हिस्सा नहीं मिलता। संपत्ति में हिन्दू महिलाओं को हिस्सा दिलाने के लिए किस तरह के प्रावधान किए जाएं?
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