Saturday, 15 October 2016

जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे सर्जिकल स्ट्राइक : सेना

Dainik Times     11:00    
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नई दिल्ली : भारतीय सेना ने करीब दो हफ्ते पहले नियंत्रण रेखा पार (पीओके) में  की गयी सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में शुक्रवार को संसदीय समिति के सामने सभी राजनीतिक दलों को जानकारी दी और बताया कि यदि दोबारा जरूरत पड़ी तो इस तरह की सर्जिकल स्ट्राइक को फिर से अंजाम दिया जा सकता है।
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सर्जिकल स्ट्राइक के "सबूतों" को लेकर हो रही राजनैतिक बयानबाजी के बीच यह पहली बार था जब आर्मी ने डीजीएमओ की स्टेटमेंट के बार सांसदों को इस बारे में आधिकारिक रूप से जानकारी दी।

उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत ने पैनल को को बताया कि कमांडो कार्रवाई विशेष इनपुट्स के आधार पर की गयी थी, जिनमें पता चला था कि नियंत्रण रेखा के उस पार आतंकियों के लांचिग पैड्स है, जिनके निशाने पर जम्मू-कश्मीर में कई लक्ष्यों को निशाना बनाना था।

आपको बता दे कि यह ब्रीफिंग 15 मिनट तक चली। लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत ने बताया कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारतीय डीजीएमओ ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह "ऑनआफ" कार्रवाई थी।

रावत ने कहा कि भविष्य में सुरक्षा हालातों को देखते हुए फैसला लिया जाएगा, यदि पाकिस्तान अपनी धरती का इस्तेमाल भारत में आतंक फैलाने के लिए करता है तो इस तरह की कार्रवाई फिर हो सकती है।

ले. जनरल रावत ने पूरे ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी जिसमें आतंकी कैंपों के हुए नुकसान, सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान मारे गए आतंकियों की संभावित संख्या शामिल थी। रावत ने बताया कि मिशन को अंजाम देने के बाद सभी सैनिक सुरक्षित लौट आए थे।

ले. जनरल रावत ने बताया कि सेना का यह मिशन आत्मरक्षा के लिए था, सेना के पास इस बात के पक्के सबूत थे कि आतंकी भारत में घुसपैठ कर बड़ा नुकसान करने वाले हैं। कमेटी के सदस्यों को यह भी जानकारी दी गयी कि पठानकोट हमले के बाद से सैन्य कार्रवाई के विकल्प के बार में विचार किया जा रहा था। उड़ी हमले के बाद सेना इस तरह की कार्रवाई करने को मजबूर हो गयी थी।


कमेटी के अध्यक्ष भुवन चंद खंडूरी ने बताया, "उप सेना प्रमुख ने कमेटी को पूरे ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी थी। अधिकतर सदस्य दी गयी जानकारी से संतुष्ट थे।"
नई दिल्ली : भारतीय सेना ने करीब दो हफ्ते पहले नियंत्रण रेखा पार (पीओके) में  की गयी सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में शुक्रवार को संसदीय समिति के सामने सभी राजनीतिक दलों को जानकारी दी और बताया कि यदि दोबारा जरूरत पड़ी तो इस तरह की सर्जिकल स्ट्राइक को फिर से अंजाम दिया जा सकता है।
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सर्जिकल स्ट्राइक के "सबूतों" को लेकर हो रही राजनैतिक बयानबाजी के बीच यह पहली बार था जब आर्मी ने डीजीएमओ की स्टेटमेंट के बार सांसदों को इस बारे में आधिकारिक रूप से जानकारी दी।

उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत ने पैनल को को बताया कि कमांडो कार्रवाई विशेष इनपुट्स के आधार पर की गयी थी, जिनमें पता चला था कि नियंत्रण रेखा के उस पार आतंकियों के लांचिग पैड्स है, जिनके निशाने पर जम्मू-कश्मीर में कई लक्ष्यों को निशाना बनाना था।

आपको बता दे कि यह ब्रीफिंग 15 मिनट तक चली। लेफ्टिनेंट जनरल विपिन रावत ने बताया कि इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारतीय डीजीएमओ ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह "ऑनआफ" कार्रवाई थी।

रावत ने कहा कि भविष्य में सुरक्षा हालातों को देखते हुए फैसला लिया जाएगा, यदि पाकिस्तान अपनी धरती का इस्तेमाल भारत में आतंक फैलाने के लिए करता है तो इस तरह की कार्रवाई फिर हो सकती है।

ले. जनरल रावत ने पूरे ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी जिसमें आतंकी कैंपों के हुए नुकसान, सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान मारे गए आतंकियों की संभावित संख्या शामिल थी। रावत ने बताया कि मिशन को अंजाम देने के बाद सभी सैनिक सुरक्षित लौट आए थे।

ले. जनरल रावत ने बताया कि सेना का यह मिशन आत्मरक्षा के लिए था, सेना के पास इस बात के पक्के सबूत थे कि आतंकी भारत में घुसपैठ कर बड़ा नुकसान करने वाले हैं। कमेटी के सदस्यों को यह भी जानकारी दी गयी कि पठानकोट हमले के बाद से सैन्य कार्रवाई के विकल्प के बार में विचार किया जा रहा था। उड़ी हमले के बाद सेना इस तरह की कार्रवाई करने को मजबूर हो गयी थी।


कमेटी के अध्यक्ष भुवन चंद खंडूरी ने बताया, "उप सेना प्रमुख ने कमेटी को पूरे ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी थी। अधिकतर सदस्य दी गयी जानकारी से संतुष्ट थे।"
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