नई दिल्ली : साइरस
मिस्त्री कोअचानक टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया। करीब 150 साल पुराने
टाटा समूह के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। उनकी जगह रतन टाटा अंतरिम चेयरमैन
बनाए गए हैं। टाटा संस देश के सबसे बड़े बिजनेस समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी
है।
29 दिसंबर, 2012 को साइरस ने रतन टाटा की ही जगह ली थी। घटना ने पूरी दुनिया के
उद्योग जगत को चौंका दिया। क्योंकि घोषणा से पहले कहीं ऐसी चर्चा तक नहीं थी।
साइरस के शपूरजी पैलनजी समूह ने फैसले को गैर-कानूनी बताया है। समूह इसे अदालत में
चुनौती देगा। सोमवार को बोर्ड बैठक में मिस्त्री को हटाने और रतन टाटा को अंतरिम
चेयरमैन बनाने का फैसला हुआ। बोर्ड ने स्थायी चेयरमैन चुनने के लिए पांच सदस्यों
की कमेटी बनाई।
इसमें रतन टाटा भी
हैं। पांच सदस्यों के पैनल ने ही नवंबर 2011 में मिस्त्री को रतन टाटा का
उत्तराधिकारी चुना था। इसके बाद उन्हें होल्डिंग कंपनी का डिप्टी चेयरमैन बनाया
गया। मिस्त्री 2006 से टाटा संस के बोर्ड में थे। समिति को चार महीने का वक्त दिया
गया है।
साइरस
टाटा संस के छठे और बिना टाटा नाम वाले दूसरे चेयरमैन :-
-जमशेदजी नुसेरवांजी
टाटा
-सर दोराब टाटा
-सर नौरोजी सकलतवाला
-जेआरडी टाटा
-रतन टाटा
-साइरस मिस्त्री
आपको बता दे कि इससे
पहले समूह के किसी चेयरमैन को हटाया नहीं गया। वे रिटायर हुए। यह भी एक तथ्य है कि
गैर-टाटा चेयरमैन ज्यादा दिन नहीं टिके। सकलतवाला छह साल तक चेयरमैन रहे, साइरस मिस्त्री चार साल। जेआरडी टाटा 53 साल तो रतन टाटा 21 साल तक
चेयरमैन रहे।
सितंबर में समूह की
इन-हाउस मैगजीन के साथ इंटरव्यू में मिस्त्री ने कहा था कि हम अगले 150 साल का
टाटा ग्रुप बना रहे हैं। उन्होंने समूह के कुछ बिजनेस की चुनौतियों का जिक्र करते
हुए कहा कि पोर्टफोलियो छोटा करने के लिए बोल्ड फैसले लेने होंगे।
यह उनके पूर्ववर्ती
रतन टाटा के कदमों के विपरीत था। रतन टाटा के नेतृत्व में समूह ने कई कपंनियों का
अधिग्रहण किया। टाटा टी ने 2000 में 45 करोड़ डॉलर में टेटली को खरीदा। टाटा स्टील
ने 2007 में कोरस को खरीदा। टाटा मोटर्स ने 2008 में जगुआर लैंडरोवर को 2.3 अरब
डॉलर में खरीदा।
ये
चुनेंगे अगला चेयरमैन :-
रतन टाटा, अंतरिम चेयरमैन, टाटा समूह वेणु श्रीनिवासन, चेयरमैन, टीवीएस ग्रुप अमित चंद्रा, एमडी, बेन कैपिटल रोनेन सेन, अमेरिका
में भारत के पूर्व राजदूत लॉर्ड कुमार भट्टाचार्य, संस्थापक,
वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप, यूके।
ये
है हटाने की वजह :-
कंपनी ने मिस्त्री को
हटाने की कोई वजह तो नहीं बताई है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक कंपनी का बोर्ड
नॉन-प्रॉफिट बिजनेस बेचने के साइरस के रवैये से खफा था। इसमें यूरोप का स्टील बिजनेस
भी है,
जिसका रतन टाटा ने अधिग्रहण किया था। साइरस सिर्फ मुनाफे वाले
बिजनेस पर ध्यान दे रहे थे। चर्चा यह भी है कि इस घटना का संबंध टाटा संस पर
नियंत्रण से हो सकता है।
टाटा संस में शपूरजी
पैलनजी की 18.5% हिस्सेदारी है। इसी आधार पर साइरस को चेयरमैन बनाया गया था। साइरस
पैलनजी मिस्त्री के बेटे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा 66% शेयर टाटा ट्रस्ट के पास है।
मिस्त्री परिवार ने 1930 के दशक में छोटे शेयरधारकों से शेयर खरीदकर टाटा संस में
अपनी होल्डिंग बढ़ाई थी। टाटा परिवार को यह नागवार गुजरा था। सूत्रों के मुताबिक छह
महीने में रतन टाटा और साइरस में काफी मतभेद हो गए थे।
नई दिल्ली : साइरस
मिस्त्री कोअचानक टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया। करीब 150 साल पुराने
टाटा समूह के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। उनकी जगह रतन टाटा अंतरिम चेयरमैन
बनाए गए हैं। टाटा संस देश के सबसे बड़े बिजनेस समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी
है।
29 दिसंबर, 2012 को साइरस ने रतन टाटा की ही जगह ली थी। घटना ने पूरी दुनिया के
उद्योग जगत को चौंका दिया। क्योंकि घोषणा से पहले कहीं ऐसी चर्चा तक नहीं थी।
साइरस के शपूरजी पैलनजी समूह ने फैसले को गैर-कानूनी बताया है। समूह इसे अदालत में
चुनौती देगा। सोमवार को बोर्ड बैठक में मिस्त्री को हटाने और रतन टाटा को अंतरिम
चेयरमैन बनाने का फैसला हुआ। बोर्ड ने स्थायी चेयरमैन चुनने के लिए पांच सदस्यों
की कमेटी बनाई।
इसमें रतन टाटा भी
हैं। पांच सदस्यों के पैनल ने ही नवंबर 2011 में मिस्त्री को रतन टाटा का
उत्तराधिकारी चुना था। इसके बाद उन्हें होल्डिंग कंपनी का डिप्टी चेयरमैन बनाया
गया। मिस्त्री 2006 से टाटा संस के बोर्ड में थे। समिति को चार महीने का वक्त दिया
गया है।
साइरस
टाटा संस के छठे और बिना टाटा नाम वाले दूसरे चेयरमैन :-
-जमशेदजी नुसेरवांजी
टाटा
-सर दोराब टाटा
-सर नौरोजी सकलतवाला
-जेआरडी टाटा
-रतन टाटा
-साइरस मिस्त्री
आपको बता दे कि इससे
पहले समूह के किसी चेयरमैन को हटाया नहीं गया। वे रिटायर हुए। यह भी एक तथ्य है कि
गैर-टाटा चेयरमैन ज्यादा दिन नहीं टिके। सकलतवाला छह साल तक चेयरमैन रहे, साइरस मिस्त्री चार साल। जेआरडी टाटा 53 साल तो रतन टाटा 21 साल तक
चेयरमैन रहे।
सितंबर में समूह की
इन-हाउस मैगजीन के साथ इंटरव्यू में मिस्त्री ने कहा था कि हम अगले 150 साल का
टाटा ग्रुप बना रहे हैं। उन्होंने समूह के कुछ बिजनेस की चुनौतियों का जिक्र करते
हुए कहा कि पोर्टफोलियो छोटा करने के लिए बोल्ड फैसले लेने होंगे।
यह उनके पूर्ववर्ती
रतन टाटा के कदमों के विपरीत था। रतन टाटा के नेतृत्व में समूह ने कई कपंनियों का
अधिग्रहण किया। टाटा टी ने 2000 में 45 करोड़ डॉलर में टेटली को खरीदा। टाटा स्टील
ने 2007 में कोरस को खरीदा। टाटा मोटर्स ने 2008 में जगुआर लैंडरोवर को 2.3 अरब
डॉलर में खरीदा।
ये
चुनेंगे अगला चेयरमैन :-
रतन टाटा, अंतरिम चेयरमैन, टाटा समूह वेणु श्रीनिवासन, चेयरमैन, टीवीएस ग्रुप अमित चंद्रा, एमडी, बेन कैपिटल रोनेन सेन, अमेरिका
में भारत के पूर्व राजदूत लॉर्ड कुमार भट्टाचार्य, संस्थापक,
वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप, यूके।
ये
है हटाने की वजह :-
कंपनी ने मिस्त्री को
हटाने की कोई वजह तो नहीं बताई है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक कंपनी का बोर्ड
नॉन-प्रॉफिट बिजनेस बेचने के साइरस के रवैये से खफा था। इसमें यूरोप का स्टील बिजनेस
भी है,
जिसका रतन टाटा ने अधिग्रहण किया था। साइरस सिर्फ मुनाफे वाले
बिजनेस पर ध्यान दे रहे थे। चर्चा यह भी है कि इस घटना का संबंध टाटा संस पर
नियंत्रण से हो सकता है।
टाटा संस में शपूरजी
पैलनजी की 18.5% हिस्सेदारी है। इसी आधार पर साइरस को चेयरमैन बनाया गया था। साइरस
पैलनजी मिस्त्री के बेटे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा 66% शेयर टाटा ट्रस्ट के पास है।
मिस्त्री परिवार ने 1930 के दशक में छोटे शेयरधारकों से शेयर खरीदकर टाटा संस में
अपनी होल्डिंग बढ़ाई थी। टाटा परिवार को यह नागवार गुजरा था। सूत्रों के मुताबिक छह
महीने में रतन टाटा और साइरस में काफी मतभेद हो गए थे।
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