Monday, 17 October 2016

विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी और अजिंक्‍य रहाणे की 'नई सोच', जर्सी के पीछे लिखें मां के नाम...

Dainik Times     11:21    
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नई दिल्ली : स्टार प्लस ने नई सोच के नाम से एक नया अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य मकसद है महिलाओं को पुरुषों के समान सम्मान देना। यह अभियान महिलाओं को समाज में पीछे रखने वाली विभिन्न सामाजिक रुढ़िवादी परंपराओं पर सवाल खड़े करता है। टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान विराट कोहली, एकदिवसीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और बल्लेबाज अजिंक्ये रहाणे ने इस अभियान को समर्थन करते हुए इसे आगे ले जाने के लिए फैसला किया है।
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आपको बता दे कि इस अभियान के तहत स्टार प्लस ने तीन शानदार अलग-अलग विज्ञापन भी बनाया है। एक विज्ञापन में महेंद्र सिंह धोनी एक ऐसी जर्सी पहनते हुए नज़र आते हैं जिसमें उनकी मां देवकी का नाम लिखा हुआ होता है। जब संवाददाता इसके पीछे खास वजह को लेकर सवाल करता है तो धोनी जवाब देते हैं, ''मैं इतने सालों से अपना पिता के नाम की जर्सी पहन रहा था तब तो आप ने कभी नहीं पूछा कि कोई खास वजह?''

दूसरे विज्ञापन में विराट कोहली की जर्सी में उनकी मां का नाम सरोज लिखा हुआ है। इस पर विराट कोहली यह कहते हुए नज़र आ रहे हैं, ''आप सोचते होंगे यह नाम किसका है, मेरा ही है,आज मैं जो भी हूं, मम्मी के वजह से तो हूं तो जाहिर सी बात है मेरी पहचान भी सिर्फ पापा के नाम से ही क्यों? जितना कोहली हूं, सरोज भी हूं, है की नहीं।''

तीसरे विज्ञापन में अजिंक्‍य रहाणे की जर्सी के पीछे उनकी मां सुजाता का नाम लिखा हुआ है और रहाणे यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, ''जब मैं छोटा था तब मेरी मां मेरी किटबैग उठती थी, और मेरे छोटे भाई को गोदी में उठाकर रोज़ मुझे प्रैक्टिस में लेकर जाती थी, मेरी प्रैक्टिस भी उनकी कसरत बन जाती थी, लोग कहते है बाप का नाम रोशन करो लेकिन मेरे लिए मां नाम भी रोशन करना इतना ही इम्पोर्टेन्ट है.''


असल ज़िंदगी में भी इन तीनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे कहीं न कहीं इनकी मां का योगदान है। जैसे कि हम जानते हैं कि विराट कोहली जब 18 साल के थे तब उनके पिता का मौत हो गई थी। तब उनकी मां ने वह हर संभव कोशिश की जिससे वह अपने पापा का सपना पूरा करते हुए एक अच्छा क्रिकेटर बने जो आज विराट कोहली हैं। बचपन में अजिंक्ये रहाणे जब प्रैक्टिस करने के लिए जाते थे, तब उनकी मां उनका किटबैग उठाते हुए उनको ड्रॉप करने जाती थी और प्रैक्टिस के बाद किटबैग लेकर वापस घर आती थी। उनके पास इतने पैसे भी नहीं होते थे कि वह ऑटो में जा सकें। धोनी की सफलता के पीछे भी कहीं न कहीं उनकी मां का योगदान है।
नई दिल्ली : स्टार प्लस ने नई सोच के नाम से एक नया अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य मकसद है महिलाओं को पुरुषों के समान सम्मान देना। यह अभियान महिलाओं को समाज में पीछे रखने वाली विभिन्न सामाजिक रुढ़िवादी परंपराओं पर सवाल खड़े करता है। टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान विराट कोहली, एकदिवसीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और बल्लेबाज अजिंक्ये रहाणे ने इस अभियान को समर्थन करते हुए इसे आगे ले जाने के लिए फैसला किया है।
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आपको बता दे कि इस अभियान के तहत स्टार प्लस ने तीन शानदार अलग-अलग विज्ञापन भी बनाया है। एक विज्ञापन में महेंद्र सिंह धोनी एक ऐसी जर्सी पहनते हुए नज़र आते हैं जिसमें उनकी मां देवकी का नाम लिखा हुआ होता है। जब संवाददाता इसके पीछे खास वजह को लेकर सवाल करता है तो धोनी जवाब देते हैं, ''मैं इतने सालों से अपना पिता के नाम की जर्सी पहन रहा था तब तो आप ने कभी नहीं पूछा कि कोई खास वजह?''

दूसरे विज्ञापन में विराट कोहली की जर्सी में उनकी मां का नाम सरोज लिखा हुआ है। इस पर विराट कोहली यह कहते हुए नज़र आ रहे हैं, ''आप सोचते होंगे यह नाम किसका है, मेरा ही है,आज मैं जो भी हूं, मम्मी के वजह से तो हूं तो जाहिर सी बात है मेरी पहचान भी सिर्फ पापा के नाम से ही क्यों? जितना कोहली हूं, सरोज भी हूं, है की नहीं।''

तीसरे विज्ञापन में अजिंक्‍य रहाणे की जर्सी के पीछे उनकी मां सुजाता का नाम लिखा हुआ है और रहाणे यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, ''जब मैं छोटा था तब मेरी मां मेरी किटबैग उठती थी, और मेरे छोटे भाई को गोदी में उठाकर रोज़ मुझे प्रैक्टिस में लेकर जाती थी, मेरी प्रैक्टिस भी उनकी कसरत बन जाती थी, लोग कहते है बाप का नाम रोशन करो लेकिन मेरे लिए मां नाम भी रोशन करना इतना ही इम्पोर्टेन्ट है.''


असल ज़िंदगी में भी इन तीनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे कहीं न कहीं इनकी मां का योगदान है। जैसे कि हम जानते हैं कि विराट कोहली जब 18 साल के थे तब उनके पिता का मौत हो गई थी। तब उनकी मां ने वह हर संभव कोशिश की जिससे वह अपने पापा का सपना पूरा करते हुए एक अच्छा क्रिकेटर बने जो आज विराट कोहली हैं। बचपन में अजिंक्ये रहाणे जब प्रैक्टिस करने के लिए जाते थे, तब उनकी मां उनका किटबैग उठाते हुए उनको ड्रॉप करने जाती थी और प्रैक्टिस के बाद किटबैग लेकर वापस घर आती थी। उनके पास इतने पैसे भी नहीं होते थे कि वह ऑटो में जा सकें। धोनी की सफलता के पीछे भी कहीं न कहीं उनकी मां का योगदान है।
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