नई दिल्ली : जापानी
एन्सेफलाइटिस से देश के कई राज्यों में हर साल हजारों बच्चों की मौत होती है।
लेकिन इसे लेकर सरकारे उदासीन हैं, क्योंकि अभी
तक इस पर कोई काबू नहीं पाया जा सका है। इसी को लेकर ओडिशा के आदिवासी बहुल
मलकानगिरी जिले के 505 गांवों में जापानी एन्सेफलाइटिस से 73 बच्चों की मौत हो
चुकी है।
आपको
बता दे कि मल्कानगिरी जिला मेडिकल अधिकारी उदयशंकर मिश्रा ने दावा किया कि जापानी
एन्सेफलाइटिस से केवल 27 बच्चों की मौत हुई है, बाकियों की मृत्यु अन्य कारणों से हुई हैं। इस संबंध में एक 10 साल के
बच्चे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मदद के लिए खत लिखा है। 10 साल के उमेश
माधी ने पत्र में लिखा, ”हमारी जान बचाइए। जापानी बुखर से
मेरे काफी दोस्तों की मौत हो चुकी है। आप पूरी दुनिया में घूम रहे हैं। क्या आप
हमारे गांव नहीं आ सकते। देखिए यहां किस तरह से बच्चे मर रहे हैं।”
बता
दे कि माधी सिकापाली ग्राम पंचायत की पोलकांडा प्राथमिक स्कूल की चौथी कक्षा में
पढ़ता है। उन्होंने खत में मर चुके बच्चों के माता-पिता के दर्द को भी बयां किया।
उमेश ने लिखा, ”सर, आप
कई देशों में घूम रहे हैं। क्या आप हमारे गांव नहीं आ सकते और यहां के लोगों की
पीड़ा नहीं देख सकते।” उसने साथ ही लिखा कि प्रधानमंत्री ही
उनकी आखिरी उम्मीद हैं। ।
राज्य
सरकार ने माना है कि पिछले तीन-चार दिन से स्थिति गंभीर है। स्पेशल ड्यूटी पर
तैनात अधिकारी नृपराज साहू ने बताया कि उम्मीदों के अनुसार स्थिति नहीं सुधरी है।
साहू को जापानी बुखार पर नजर पर बनाए रखने के लिए मलकानगिरी भेजा गया है। उन्होंने
पत्रकारों से कहा, जिला प्रशासन के सभी संभावित
कदमों के बावजूद स्थिति नाजुक बनी हुई है।
नई दिल्ली : जापानी
एन्सेफलाइटिस से देश के कई राज्यों में हर साल हजारों बच्चों की मौत होती है।
लेकिन इसे लेकर सरकारे उदासीन हैं, क्योंकि अभी
तक इस पर कोई काबू नहीं पाया जा सका है। इसी को लेकर ओडिशा के आदिवासी बहुल
मलकानगिरी जिले के 505 गांवों में जापानी एन्सेफलाइटिस से 73 बच्चों की मौत हो
चुकी है।
आपको
बता दे कि मल्कानगिरी जिला मेडिकल अधिकारी उदयशंकर मिश्रा ने दावा किया कि जापानी
एन्सेफलाइटिस से केवल 27 बच्चों की मौत हुई है, बाकियों की मृत्यु अन्य कारणों से हुई हैं। इस संबंध में एक 10 साल के
बच्चे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मदद के लिए खत लिखा है। 10 साल के उमेश
माधी ने पत्र में लिखा, ”हमारी जान बचाइए। जापानी बुखर से
मेरे काफी दोस्तों की मौत हो चुकी है। आप पूरी दुनिया में घूम रहे हैं। क्या आप
हमारे गांव नहीं आ सकते। देखिए यहां किस तरह से बच्चे मर रहे हैं।”
बता
दे कि माधी सिकापाली ग्राम पंचायत की पोलकांडा प्राथमिक स्कूल की चौथी कक्षा में
पढ़ता है। उन्होंने खत में मर चुके बच्चों के माता-पिता के दर्द को भी बयां किया।
उमेश ने लिखा, ”सर, आप
कई देशों में घूम रहे हैं। क्या आप हमारे गांव नहीं आ सकते और यहां के लोगों की
पीड़ा नहीं देख सकते।” उसने साथ ही लिखा कि प्रधानमंत्री ही
उनकी आखिरी उम्मीद हैं। ।
राज्य
सरकार ने माना है कि पिछले तीन-चार दिन से स्थिति गंभीर है। स्पेशल ड्यूटी पर
तैनात अधिकारी नृपराज साहू ने बताया कि उम्मीदों के अनुसार स्थिति नहीं सुधरी है।
साहू को जापानी बुखार पर नजर पर बनाए रखने के लिए मलकानगिरी भेजा गया है। उन्होंने
पत्रकारों से कहा, जिला प्रशासन के सभी संभावित
कदमों के बावजूद स्थिति नाजुक बनी हुई है।
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