नई दिल्ली : ब्रिटेन
की दिग्गज कंपनी रॉल्स रॉयस ने एक बड़ा सौदा हासिल करने के लिए एक भारतीय डिफेंस
एजेंट को 10 मिलियन पाउंड्स (यानि करीब 82 करोड़ रुपए) की घूस दी थी। इस 'सीक्रेट पेमेंट' के बदले में एजेंट ने कंपनी को
इंडियन एयरफोर्स में यूज किए जाने वाले हॉक (Hawk) विमानों
के इंजन का कॉन्ट्रैक्ट दिलाने में मदद की। कंपनी ने भारत समेत दुनिया के 12 देशों
में कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए बिचौलियों या एजेंट की मदद ली थी।
न्यूज एजेंसी के
मुताबिक,
बीते सोमवार को बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। रिपोर्ट
में घूस लेने वाले इंडियन डिफेंस एजेंट (आर्म्स डीलर) का नाम सुधीर चौधरी बताया
गया है। पहले दिल्ली में रहने वाला चौधरी
अब लंदन में रहता है। उसे भारत सरकार ने ब्लैकलिस्ट कर रखा है। इस ब्लैकलिस्ट में
गवर्नमेंट ऑफिशियल्स और मिनिस्टर्स को इस लिस्ट में शामिल लोगों और कंपनियों से
डील करते वक्त सावधानी बरतने की वॉर्निंग भी दी गई है। चौधरी के खिलाफ कई आर्म्स
डील को लेकर सीबीआई और ईडी जांच कर चुकी हैं।
कौन
है सुधीर चौधरी?
मीडिया रिपोर्ट में
सुधीर चौधरी के वकील के हवाले से यह भी कहा गया है कि उसके क्लाइंट ने भारत सरकार
के ऑफिशियल्स को कभी भी घूस नहीं दी। 'न ही चौधरी
ने डिफेंस डील्स में कभी गैरकानूनी तरीके से बिचौलिए का काम किया।' चौधरी ब्रिटेन में लिबरल डेमोक्रेट लीडर टिम फेरॉन और उनकी फैमिली का
एडवाइजर है। घूस के आरोपों पर चौधरी और उसके बेटे भानु को अरेस्ट कर पूछताछ भी की
गई थी, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया था। जिसके बाद
उन्हें रिहा कर दिया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, रॉल्स रॉयस ने चौधरी और उसके परिवार की कंपनियों के अकाउंट्स में 2
अक्टूबर 2008 को लाखों पाउंड्स ट्रांसफर किए थे। चौधरी के बेटे भानु (डील में
जिसका नाम पीटर जिंजर है) ने 2007 में स्विट्जरलैंड का दौरा किया था। उसी दौरान
मि. जिंजर ने अपने एक सीक्रेट बैंक अकाउंट में हजारों पाउंड्स ट्रांसफर किए गए थे।
मि. जिंजर ही भारत सरकार को हॉक प्लेन बेचने में मुख्य सौदेबाज था। यह पूरी डील
400 मिलियन पाउंड (करीब 4000 करोड़ रुपए) में हुई थी।
बीबीसी ने गार्जियन
के साथ मिलकर इस मामले की तहकीकात की है। इन्होंने कई लीक डॉक्युमेंट्स और
अंदरूनी सूत्रों के बयानों के आधार पर कहा है कि रॉल्स रॉयस ने गैरकानूनी तरीके
से पेमेंट कर वर्षों तक प्रॉफिट कमाया। अब ब्रिटेन और अमेरिका की एंटी करप्शन
एजेंसीज के सामने बड़े पैमाने इन एजेंटों के नेटवर्क का पता लगाने का जिम्मा है।
जिन 12 देशों में
कंपनी ने एजेंट्स को हायर किया, उनमें ब्राजील, भारत, चीन, इंडोनेशिया,
साउथ अफ्रीका, अंगोला, इराक,
ईरान, कजाकिस्तान, अजरबैजान,
नाइजीरिया और सऊदी अरब शामिल हैं।
आपको बता दे कि रॉल्स
रॉयस ने सिर्फ इतना कहा- 'हम अथॉरिटीज के साथ मामले की
जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।' कंपनी ने इसके अलावा और
कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। ब्रिटेन से खरीदे गए हॉक एयरक्राफ्ट का
इस्तेमाल इंडियन एयरफोर्स ट्रेनिंग के लिए करती है।
नई दिल्ली : ब्रिटेन
की दिग्गज कंपनी रॉल्स रॉयस ने एक बड़ा सौदा हासिल करने के लिए एक भारतीय डिफेंस
एजेंट को 10 मिलियन पाउंड्स (यानि करीब 82 करोड़ रुपए) की घूस दी थी। इस 'सीक्रेट पेमेंट' के बदले में एजेंट ने कंपनी को
इंडियन एयरफोर्स में यूज किए जाने वाले हॉक (Hawk) विमानों
के इंजन का कॉन्ट्रैक्ट दिलाने में मदद की। कंपनी ने भारत समेत दुनिया के 12 देशों
में कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए बिचौलियों या एजेंट की मदद ली थी।
न्यूज एजेंसी के
मुताबिक,
बीते सोमवार को बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। रिपोर्ट
में घूस लेने वाले इंडियन डिफेंस एजेंट (आर्म्स डीलर) का नाम सुधीर चौधरी बताया
गया है। पहले दिल्ली में रहने वाला चौधरी
अब लंदन में रहता है। उसे भारत सरकार ने ब्लैकलिस्ट कर रखा है। इस ब्लैकलिस्ट में
गवर्नमेंट ऑफिशियल्स और मिनिस्टर्स को इस लिस्ट में शामिल लोगों और कंपनियों से
डील करते वक्त सावधानी बरतने की वॉर्निंग भी दी गई है। चौधरी के खिलाफ कई आर्म्स
डील को लेकर सीबीआई और ईडी जांच कर चुकी हैं।
कौन
है सुधीर चौधरी?
मीडिया रिपोर्ट में
सुधीर चौधरी के वकील के हवाले से यह भी कहा गया है कि उसके क्लाइंट ने भारत सरकार
के ऑफिशियल्स को कभी भी घूस नहीं दी। 'न ही चौधरी
ने डिफेंस डील्स में कभी गैरकानूनी तरीके से बिचौलिए का काम किया।' चौधरी ब्रिटेन में लिबरल डेमोक्रेट लीडर टिम फेरॉन और उनकी फैमिली का
एडवाइजर है। घूस के आरोपों पर चौधरी और उसके बेटे भानु को अरेस्ट कर पूछताछ भी की
गई थी, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया था। जिसके बाद
उन्हें रिहा कर दिया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, रॉल्स रॉयस ने चौधरी और उसके परिवार की कंपनियों के अकाउंट्स में 2
अक्टूबर 2008 को लाखों पाउंड्स ट्रांसफर किए थे। चौधरी के बेटे भानु (डील में
जिसका नाम पीटर जिंजर है) ने 2007 में स्विट्जरलैंड का दौरा किया था। उसी दौरान
मि. जिंजर ने अपने एक सीक्रेट बैंक अकाउंट में हजारों पाउंड्स ट्रांसफर किए गए थे।
मि. जिंजर ही भारत सरकार को हॉक प्लेन बेचने में मुख्य सौदेबाज था। यह पूरी डील
400 मिलियन पाउंड (करीब 4000 करोड़ रुपए) में हुई थी।
बीबीसी ने गार्जियन
के साथ मिलकर इस मामले की तहकीकात की है। इन्होंने कई लीक डॉक्युमेंट्स और
अंदरूनी सूत्रों के बयानों के आधार पर कहा है कि रॉल्स रॉयस ने गैरकानूनी तरीके
से पेमेंट कर वर्षों तक प्रॉफिट कमाया। अब ब्रिटेन और अमेरिका की एंटी करप्शन
एजेंसीज के सामने बड़े पैमाने इन एजेंटों के नेटवर्क का पता लगाने का जिम्मा है।
जिन 12 देशों में
कंपनी ने एजेंट्स को हायर किया, उनमें ब्राजील, भारत, चीन, इंडोनेशिया,
साउथ अफ्रीका, अंगोला, इराक,
ईरान, कजाकिस्तान, अजरबैजान,
नाइजीरिया और सऊदी अरब शामिल हैं।
आपको बता दे कि रॉल्स
रॉयस ने सिर्फ इतना कहा- 'हम अथॉरिटीज के साथ मामले की
जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।' कंपनी ने इसके अलावा और
कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। ब्रिटेन से खरीदे गए हॉक एयरक्राफ्ट का
इस्तेमाल इंडियन एयरफोर्स ट्रेनिंग के लिए करती है।
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