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Saturday, 12 November 2016

PM मोदी ने आबे संग की शिंकनसेन बुलेट ट्रेन की सवारी!

Dainik Times     10:40    
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नई दिल्ली : जापान के तीन दिवसीय दौरे के आखिरी दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को टोक्यो से कोबे जाने के लिए प्रसिद्ध शिंकनसेन बुलेट ट्रेन में सवारी की। उनके साथ शिंजो आबे भी मौजूद थे।

पीएम मोदी और आबे दोनों कोबे में कावासाकी हैवी इंडस्ट्रीज फैसिलिटी का भी दौरा करेंगे, जहां उच्च गति के रेल पहिए तैयार किए जाते हैं। पीएम मोदी ने आज सुबह बुलेट ट्रेन के सफर की फोटो ट्विटर पर शेयर की।
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आपको बता दे कि इससे पहले शुक्रवार को जापान ने अपनी आपत्तियों को खत्म करते हुए और अपने परंपरागत रूख से हटते हुए भारत के साथ ऐतिहासिक असैन्य परमाणु सहयोग करार पर हस्ताक्षर किया, जिसके साथ ही परमाणु क्षेत्र में दोनों देशों के उद्योगों के बीच गठजोड़ के लिए दरवाजे खुल गए। हालांकि टोक्यों की संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए इस करार में सुरक्षा के पहलू को भी शामिल किया गया है।

अपने जापानी समकक्ष शिंजो आबे के साथ विस्तृत बातचीत के बाद पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच हुए इस परमाणु करार को ऐतिहासिक बताया। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में व्यापार एवं निवेश, सुरक्षा, आतंकवाद, कौशल विकास में सहयोग, अंतरिक्ष और जन संपर्क जैसै विषय भी शामिल रहे।

दोनों देशों के बीच छह साल से अधिक समय की गहन बातचीत के बाद दोनों देशों ने परमाणु करार पर हस्ताक्षर किए।

करार पर हस्ताक्षर के बाद विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा कि भारत और जापान ने जिस ऐतिहासिक परमाणु करार पर हस्ताक्षर किए वह अमेरिका और कुछ अन्य देशों के साथ हुए असैन्य परमाणु करार वाली विशेषताओं को समेटे हुए है, हालांकि जापान की संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के संदर्भ में कुछ अलग पहलुओ को भी इसमें शामिल किया गया है।


चीन की आपत्तियों के बावजूद दोनों नेताओं ने दक्षिणी चीन सागर के मुद्दे पर बातचीत की और इस बात पर सहमति जताई कि समुद्र से जुड़े कानून (यूएनक्लोस) को लेकर संयुक्त राष्ट्र संधि पर आधारित नौवहन और उड़ान भरने तथा निर्बाध कानूनी वाणिज्य की स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए।

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Friday, 11 November 2016

भारत और जापान के बीच ऐतिहासिक असैन्य परमाणु करार पर लगी मुहर

Dainik Times     19:18    
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नई दिल्ली : भारत और जापान ने शुक्रवार को ऐतिहासिक असैन्य परमाणु करार पर हस्ताक्षर किए। जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार किसी गैर एनपीटी देश के साथ इस तरह का रणनीति करार किया है। इसके साथ ही दोनों देशों ने करीब 10 अन्य करारों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
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आपको बता दे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष के बीच हुई वार्ता के बाद दोनों देशों ने इस ऐतिहासिक करार पर औपचारिक मुहर लगाई। पिछले साल दिसंबर में आबे की भारत यात्रा के समय ही दोनों देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को लेकर सहमति जताई थी। हालांकि, कुछ मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने की स्थिति में करार को औपचारिक मंजूरी नहीं मिल पाई थी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने शुक्रवार को ट्वीट किया, स्वच्छ और हरित विश्व के लिए एक ऐतिहासिक करार। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री आबे ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौते के आदान प्रदान के गवाह बने। इस करार से जापान भारत में परमाणु तकनीक का निर्यात कर सकेगा।

इसके साथ ही भारत जापान के साथ ऐसा करार करने वाला पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने एनपीटी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। यह करार द्विपक्षीय आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को भी मजबूती प्रदान करेगा।

गौरतलब है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान को परमाणु हमले का सामना करना पड़ा था। इसी वजह से जापान में भारत के साथ परमाणु करार को लेकर प्रतिरोध था। वर्ष 2011 के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में हुए हादसे के बाद से यह विरोध कहीं अधिक था।

ये होंगे फायदे :-
परमाणु ऊर्जा बाजार में जापान एक प्रमुख देश है। इसलिए करार होने से अमेरिका स्थित परमाणु संयंत्रों के निर्माताओं वेस्टिंग्सहाउस इलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन और जीई एनर्जी इंक के लिए भारत में परमाणु संयंत्र लगाना आसान हो जाएगा, क्योंकि इन दोनों कंपनियों का जापान में निवेश है। इसके साथ ही परमाणु आपूर्तिकता समूह की सदस्यता की कोशिश में भी भारत को बल मिला है।

भारत सबसे पहले द्विपक्षीय असैन्य परमाणु करार अमेरिका के साथ किया था। इसके अलावा रूस, दक्षिण कोरिया, मंगोलिया, फ्रांस, नामिबिया, अर्जेंटीना, कनाडा, कजाखस्तान तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ भी भारत ने असैन्य परमाणु करार किए हैं।

ये करार भी हुए :-
#रेलवे और परिवहन, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डों और शहरी विकास के लिए राष्ट्रीय निवेश एवं अधारभूत संरचना कोष (एनआईआईएफ)और जापान ओवरसीज इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट कॉरपोरेशन फॉर ट्रांसपोट एंड अर्बन डेवलपमेंट (जेओआईएन)के बीच करार।

#ग्रहीय खोज और सैटेलाइट नौवहन साझेदारी के लिए भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन (इसरो) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जेएएक्सए) के बीच में करार.

#अंतरिक्ष शोध और विकास के लिए दोनों देशों की आधारभूत संरचनाओं का साझा इस्तेमाल और संयुक्त मिशन।  


#संयुक्त सर्वे और शोध, वैज्ञानिक यात्रा के लिए भारत के पृथ्वी विज्ञान और जापान के मरीन-अर्थ साइंस के बीच करार।

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जापान में PM मोदी ने कहा- भारत को विश्व की सबसे मुक्त अर्थव्यवस्था बनना है मेरा उद्देश्य!

Dainik Times     11:40    
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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जापानी निवेश आमंत्रित करते हुए कहा कि भारत को वित्तीय संसाधनों की काफी जरूरत है और उनकी सरकार देश को विश्व की ‘‘सबसे मुक्त’’ अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सुधारों को आगे बढ़ा रही है।
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‘इंडिया-जापान बिजनेस लीडर्स फोरममें कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने जीएसटी मुद्दे पर हुई प्रगति का जिक्र किया और भारत में कारोबार को आसान बनाने के लिए नीतियों एवं निवेश नियमों में किए गए अन्य सुधारों पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मेक इन इंडियाको बढ़ावा देने के लिए और स्थायी एवं पारदर्शी नियमन प्रणालियों के माध्यम से सकारात्मक माहौल बनाने के वास्ते सुधार नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत आर्थिक सुधारों की एक नई दिशा में बढ़ रहा है। मेरा संकल्प इसे विश्व की सबसे मुक्त अर्थव्यवस्था बनाने का है। इससे पहले पीएम मोदी ने अपने जापानी समकक्ष शिंजो अबे के साथ अहम द्विपक्षीय वार्ता से पहले जापान के सम्राट अकिहितो से आज बातचीत की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट किया, ‘‘एक दुर्लभ बातचीत जो भारत और जापान के बीच गर्मजोशी भरे अनूठे संबंधों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के महामहिम सम्राट अकिहितो का अभिवादन किया।’’

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘समयता की बात की गई। प्रधानमंत्री मोदी और सम्राट अकिहितो ने भारत और जापान के संबंधों और एशिया के भविष्य पर बातचीत की।’’ यह बातचीत मोदी और अबे के बीच व्यापक मुद्दों पर चर्चा से पहले की गई जिसका लक्ष्य द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को प्रोत्साहित करना था।

सूत्रों ने बताया कि वाषिर्क शिखर सम्मेलन के बाद दोनों पक्ष करीब 12 समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे। असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर होने की भी बहुत संभावनाएं हैं।


मोदी और आबे शनिवार को शिंकनसेन हाई-सपीड रेल से कोबे की यात्रा करेंगे। पिछले साल आबे की भारत यात्रा के दौरान जापान ने मुंबई से अहमदाबाद के बीच हाई-सपीड रेल लिंक के विकास की प्रतिबद्धता जताई थी। यह पिछले दो सालों में पीएम मोदी की दूसरी जापान यात्रा है।

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Monday, 5 September 2016

NSG मेंबरशि‍प पर जापान ने दिया भारत का साथ, कहा- परमाणु अप्रसार को बढ़ावा देने के लिए एनएसजी में भारत की जरूरत!

Dainik Times     09:44    
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नई दिल्ली : परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनसएसजी) में भारत की सदस्यता के प्रयासों को सोल की बैठक में चीन ने सबसे गहरा झटका दिया। पड़ोसी के अड़ियल रुख के कारण ही हिंदुस्तान एनएसजी देशों में शामिल नहीं हो सका, वहीं अब जापान ने यह कहकर चीन को बड़ा झटका दिया है कि भारत की सदस्यता और एनएसजी में मौजूदगी से परमाणु अप्रसार को बढ़ावा में मदद मिलेगी।
japan-says-need-india-in-nsg-to-promote-non-proliferation-news-in-hindi

सोल बैठक के बाद पहली बार जापान ने इस मुद्दे पर आधिकारिक टिप्पणी की है। जापानी विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने अंग्रेजी अखबार 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा, 'हम एनएसजी में सदस्यता को संभव बनाने के लिए भारत के साथ लगातार काम कर रहे हैं।'

जापानी विदेश मंत्रालय में प्रेस एंड पब्लिक डिप्लोमेसी के महानिदेशक यासुकिरा कावमोरा ने कहा, 'हम इस मुद्दे पर भारत के साथ काम करते रहना चाहते हैं, क्योंकि हमें लगता है कि भारत की सदस्यता से परमाणु अप्रसार व्यवस्था को ताकत मिलेगी। जापान एनएसजी के दूसरे सदस्य देशों के साथ इस मुद्दे पर लगातार बातचीत करता रहेगा।'

कावमोरा ने आगे कहा कि भारत की सदस्यता रोकने को लेकर चीन रवैये से सभी वाकिफ हैं। जापान इस मुद्दे पर एनएसजी के अंदर हुई बातचीत पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा, 'मुख्य मुद्दा आम राय बनाने को सुनिश्चित करना है और हम इस पर काम कर रहे हैं।' आपको बता दें कि कावमोरा कुछ साल पहले दिल्ली में जापान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के रूप में भी काम कर चुके हैं।

जापानी विदेश मंत्रालय के एक और शीर्ष अधिकारी और साउथवेस्ट एशिया डिविजन में सीनियर रीजनल कॉर्डिनेटर मासायुकि तागा ने कहा कि भारत की सदस्यता से परमाणु अप्रसार को बढ़ावा देने में जापान को मदद मिलेगी।


भारत की दावेदारी का समर्थन करते हुए भी जापान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) को लेकर अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है। कावमोरा ने कहा कि जापान सामान्य भावना के साथ भारत को इस समझौते पर दस्तखत करने को कहता रहेगा। हालांकि, टोक्यो ने एनएसजी में एंट्री के लिए भारत की मदद की राह में उसके एनपीटी पर दस्तखत नहीं करने वाले राष्ट्र के दर्जे को बाधक नहीं बनने दिया।

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