Monday, 25 July 2016

पंजाब से दूर रहने के लिए कहा गया, इसलिए दिया इस्तीफाः नवजोत सिंह सिद्धू

Dainik Times     14:30    
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नई दिल्ली : बीजेपी में बगावत का झंडा बुलंद करने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने आज साफ किया कि क्यों उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दिया। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिद्धू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 'मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि मुझसे कहा गया था कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे।

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सिद्धू ने आगे कहा 'मुझसे कहा गया कि तुम पंजाब से दूर रहोगे। धर्मों में सबसे बड़ा धर्म राष्ट्रधर्म होता है। तो फिर कैसे मैं अपनी जड़, अपना वतन छोड़ दूं।' उधर बीजेपी ने साफ किया है कि सिद्धू को पंजाब से दूर रहने के लिए कभी नहीं कहा गया। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि इस शर्त पर सिद्धू राज्यसभा नहीं जाते।

सिद्धू ने बीजेपी का नाम नहीं लिया लेकिन यह ज़रूर कहा कि 'मोदी की लहर ने सिर्फ विपक्ष को ही नहीं सिद्धू को भी डुबो दिया।' राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके सिद्धू ने कहा 'चार इलेक्शन जीतने के बाद राज्यसभा देकर कहा जाता है कि सिद्धू पंजाब से दूर रहो। लेकिन पंछी भी शाम को अपने घौंसले में लौटता है।

राष्ट्रभक्त पक्षी भी अपने पेड़ नहीं छोड़ते। दुनिया की कोई भी पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है और कोई भी नफा नुकसान हो उसे झेलने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू तैयार है। अपने निजी स्वार्थों के लिए उन लोगों को नहीं छोड़ सकता जिन्होंने मुझे वोट दिया।'

दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी में शामिल होने वाले सवाल को सिद्धू टाल गए और उन्होंने कहा कि 'जहां पंजाब का हित होगा, वहां जाऊंगा।' दरअसल सिद्धू राज्यसभा से इस्तीफ़ा दे चुके हैं और उनके आम आदमी पार्टी में जाने की अटकलें हैं।

हालांकि पंजाब बीजेपी की तरफ़ से बार-बार यह कहा जा रहा था कि अब तक उन्हें सिद्धू का इस्तीफ़ा नहीं मिला है जबकि सिद्धू की पत्नी नवजौत कौर ने साफ़ किया था कि राज्यसभा से इस्तीफे का मतलब बीजेपी से भी इस्तीफा है।

इससे पहले इस्तीफे पर संक्षिप्त बयान में सिद्धू ने अपनी भावी योजना के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया था, लेकिन संकेत हैं कि वह अपनी पार्टी में राज्य में चल रही चीजों से नाखुश थे। सिद्धू ने अपने बयान में कहा था 'सम्मानीय प्रधानमंत्री के कहने पर मैंने पंजाब के कल्याण के लिए राज्यसभा का मनोयन स्वीकार कर लिया था।

पंजाब के लिए हर खिड़की बंद होने के साथ उद्देश्य धराशायी हो गया। अब यह महज बोझ रह गया। मैंने इसे नहीं ढोना सही समझा।' उन्होंने कहा, 'सही और गलत की लड़ाई में आप आत्मकेंद्रित होने के बजाय तटस्थ नहीं रह सकते। पंजाब का हित सर्वोपरि है।'


नई दिल्ली : बीजेपी में बगावत का झंडा बुलंद करने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने आज साफ किया कि क्यों उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दिया। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिद्धू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 'मैंने इस्तीफा दिया क्योंकि मुझसे कहा गया था कि पंजाब की तरफ मुंह नहीं करोगे।

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सिद्धू ने आगे कहा 'मुझसे कहा गया कि तुम पंजाब से दूर रहोगे। धर्मों में सबसे बड़ा धर्म राष्ट्रधर्म होता है। तो फिर कैसे मैं अपनी जड़, अपना वतन छोड़ दूं।' उधर बीजेपी ने साफ किया है कि सिद्धू को पंजाब से दूर रहने के लिए कभी नहीं कहा गया। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया है कि इस शर्त पर सिद्धू राज्यसभा नहीं जाते।

सिद्धू ने बीजेपी का नाम नहीं लिया लेकिन यह ज़रूर कहा कि 'मोदी की लहर ने सिर्फ विपक्ष को ही नहीं सिद्धू को भी डुबो दिया।' राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके सिद्धू ने कहा 'चार इलेक्शन जीतने के बाद राज्यसभा देकर कहा जाता है कि सिद्धू पंजाब से दूर रहो। लेकिन पंछी भी शाम को अपने घौंसले में लौटता है।

राष्ट्रभक्त पक्षी भी अपने पेड़ नहीं छोड़ते। दुनिया की कोई भी पार्टी पंजाब से ऊपर नहीं है और कोई भी नफा नुकसान हो उसे झेलने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू तैयार है। अपने निजी स्वार्थों के लिए उन लोगों को नहीं छोड़ सकता जिन्होंने मुझे वोट दिया।'

दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी में शामिल होने वाले सवाल को सिद्धू टाल गए और उन्होंने कहा कि 'जहां पंजाब का हित होगा, वहां जाऊंगा।' दरअसल सिद्धू राज्यसभा से इस्तीफ़ा दे चुके हैं और उनके आम आदमी पार्टी में जाने की अटकलें हैं।

हालांकि पंजाब बीजेपी की तरफ़ से बार-बार यह कहा जा रहा था कि अब तक उन्हें सिद्धू का इस्तीफ़ा नहीं मिला है जबकि सिद्धू की पत्नी नवजौत कौर ने साफ़ किया था कि राज्यसभा से इस्तीफे का मतलब बीजेपी से भी इस्तीफा है।

इससे पहले इस्तीफे पर संक्षिप्त बयान में सिद्धू ने अपनी भावी योजना के बारे में ज्यादा खुलासा नहीं किया था, लेकिन संकेत हैं कि वह अपनी पार्टी में राज्य में चल रही चीजों से नाखुश थे। सिद्धू ने अपने बयान में कहा था 'सम्मानीय प्रधानमंत्री के कहने पर मैंने पंजाब के कल्याण के लिए राज्यसभा का मनोयन स्वीकार कर लिया था।

पंजाब के लिए हर खिड़की बंद होने के साथ उद्देश्य धराशायी हो गया। अब यह महज बोझ रह गया। मैंने इसे नहीं ढोना सही समझा।' उन्होंने कहा, 'सही और गलत की लड़ाई में आप आत्मकेंद्रित होने के बजाय तटस्थ नहीं रह सकते। पंजाब का हित सर्वोपरि है।'
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