नई दिल्ली : केन्द्रीय
मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई अहम बैठक में रेल बजट को आम बजट के साथ पेश करने पर
मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने आज रेल बजट को आम बजट में मर्जर पर मुहर लगा दी है।
यानी अब रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा। कैबिनेट की इस बैठक के बाद वित्त
मंत्री अरुण जेटली आज दोपहर बाद एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, मंत्रिमंडल ने अलग से रेल बजट पेश करने की व्यवस्था समाप्त करने और इसे आम
बजट में मिलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
आपको बता दें कि
सरकार बीते कुछ दिनों से रेलवे बजट को आम बजट में मिलाने पर विचार कर रही थी। रेल
मंत्री सुरेश प्रभु पहले ही बजट के विलय के प्रस्ताव को अपनी सहमति दे चुके हैं।
इससे रेल बजट को अलग से पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा खत्म हो गई है।
बजट में विभिन्न
मंत्रालयों के खर्च को योजना और गैर-योजना बजट के तौर पर दिखाये जाने की व्यवस्था
को भी समाप्त किये जाने का प्रस्ताव है। सरकार का इरादा समूची बजट प्रक्रिया को एक
अप्रैल को नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले पूरी करने का है, ताकि बजट प्रस्तावों को नया वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही अमल में लाया
जा सके। यही वजह है कि बजट बनाने की पूरी प्रक्रिया को समय से पहले शुरू किया जा
रहा है।
सूत्रों के अनुसार
सरकार संसद का बजट सत्र 25 जनवरी 2017 से पहले बुला सकती है। विभिन्न मंत्रालय अब
व्यय की मध्यवर्षीय समीक्षा 15 नवंबर तक पूरी कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि
इसके पीछे मकसद पूरी बजट प्रक्रिया को 24 मार्च से पहले समाप्त करना है।
विनियोग विधेयक और
वित्त विधेयक सहित पूरा बजट संसद में 24 मार्च से पहले पारित कराने की योजना है।
वित्त मंत्रालय द्वारा इस संबंध में तैयार प्रस्ताव में कहा गया है कि इस दौरान
संसद में 10-15 फरवरी से 10-15 मार्च तक तीन सप्ताह का अवकाश रखा जायेगा। इस दौरान
संसदीय समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बजट की गहन जांच परख करेंगी।
रेल बजट को आम बजट
में मिला दिये जाने और बजट पेश करने की तिथि पहले करने के बाद अलग से विनियोग
विधेयक और लेखानुदान पेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। मौजूदा प्रक्रिया में अप्रैल
से जून तीन माह के लिये पहले लेखानुदान पारित कराया जाता है। रेलवे बजट के सभी
प्रस्ताव आम बजट में शामिल कर दिये जाने के बावजूद रेलवे एक अलग इकाई का अपना
रुतबा बनाये रखेगी। रेलवे की विभागीय तौर पर चलाये जाने वाले एक वाणिज्यिक उपक्रम
की अलग पहचान बनी रहेगी।
सूत्रों का कहना है
कि रेलवे की कामकाज में स्वायत्तता भी बनी रहेगी। रेलवे को, जैसा कि वर्तमान व्यवस्था में है, वित्तीय अधिकार भी
बने रहेंगे। वित्त मंत्रालय अन्य मंत्रालयों की तरह रेलवे को भी उसके पूंजी व्यय
के लिये सकल बजट समर्थन देता रहेगा। जहां तक योजना और गैर-योजना बजट वर्गीकरण को
समाप्त करने की बात है, वित्त मंत्री अरुण जेटली इस साल के
बजट में पहले ही इसकी घोषणा कर चुके हैं।
सूत्रों का कहना है
कि बजट को एक महीना पहले पेश करने और समूची बजट प्रक्रिया नये वित्त वर्ष की शुरआत
से पहले पूरी होने से मंत्रालयों और विभागों को अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन को
वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही बेहतर ढंग से करने में मदद मिलेगी। विभिन्न पक्षों
के साथ बजट पूर्व विचार विमर्श को 25 दिसंबर से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
नई दिल्ली : केन्द्रीय
मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई अहम बैठक में रेल बजट को आम बजट के साथ पेश करने पर
मंजूरी दे दी है। कैबिनेट ने आज रेल बजट को आम बजट में मर्जर पर मुहर लगा दी है।
यानी अब रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा। कैबिनेट की इस बैठक के बाद वित्त
मंत्री अरुण जेटली आज दोपहर बाद एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, मंत्रिमंडल ने अलग से रेल बजट पेश करने की व्यवस्था समाप्त करने और इसे आम
बजट में मिलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
आपको बता दें कि
सरकार बीते कुछ दिनों से रेलवे बजट को आम बजट में मिलाने पर विचार कर रही थी। रेल
मंत्री सुरेश प्रभु पहले ही बजट के विलय के प्रस्ताव को अपनी सहमति दे चुके हैं।
इससे रेल बजट को अलग से पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा खत्म हो गई है।
बजट में विभिन्न
मंत्रालयों के खर्च को योजना और गैर-योजना बजट के तौर पर दिखाये जाने की व्यवस्था
को भी समाप्त किये जाने का प्रस्ताव है। सरकार का इरादा समूची बजट प्रक्रिया को एक
अप्रैल को नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले पूरी करने का है, ताकि बजट प्रस्तावों को नया वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही अमल में लाया
जा सके। यही वजह है कि बजट बनाने की पूरी प्रक्रिया को समय से पहले शुरू किया जा
रहा है।
सूत्रों के अनुसार
सरकार संसद का बजट सत्र 25 जनवरी 2017 से पहले बुला सकती है। विभिन्न मंत्रालय अब
व्यय की मध्यवर्षीय समीक्षा 15 नवंबर तक पूरी कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि
इसके पीछे मकसद पूरी बजट प्रक्रिया को 24 मार्च से पहले समाप्त करना है।
विनियोग विधेयक और
वित्त विधेयक सहित पूरा बजट संसद में 24 मार्च से पहले पारित कराने की योजना है।
वित्त मंत्रालय द्वारा इस संबंध में तैयार प्रस्ताव में कहा गया है कि इस दौरान
संसद में 10-15 फरवरी से 10-15 मार्च तक तीन सप्ताह का अवकाश रखा जायेगा। इस दौरान
संसदीय समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बजट की गहन जांच परख करेंगी।
रेल बजट को आम बजट
में मिला दिये जाने और बजट पेश करने की तिथि पहले करने के बाद अलग से विनियोग
विधेयक और लेखानुदान पेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। मौजूदा प्रक्रिया में अप्रैल
से जून तीन माह के लिये पहले लेखानुदान पारित कराया जाता है। रेलवे बजट के सभी
प्रस्ताव आम बजट में शामिल कर दिये जाने के बावजूद रेलवे एक अलग इकाई का अपना
रुतबा बनाये रखेगी। रेलवे की विभागीय तौर पर चलाये जाने वाले एक वाणिज्यिक उपक्रम
की अलग पहचान बनी रहेगी।
सूत्रों का कहना है
कि रेलवे की कामकाज में स्वायत्तता भी बनी रहेगी। रेलवे को, जैसा कि वर्तमान व्यवस्था में है, वित्तीय अधिकार भी
बने रहेंगे। वित्त मंत्रालय अन्य मंत्रालयों की तरह रेलवे को भी उसके पूंजी व्यय
के लिये सकल बजट समर्थन देता रहेगा। जहां तक योजना और गैर-योजना बजट वर्गीकरण को
समाप्त करने की बात है, वित्त मंत्री अरुण जेटली इस साल के
बजट में पहले ही इसकी घोषणा कर चुके हैं।
सूत्रों का कहना है
कि बजट को एक महीना पहले पेश करने और समूची बजट प्रक्रिया नये वित्त वर्ष की शुरआत
से पहले पूरी होने से मंत्रालयों और विभागों को अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन को
वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही बेहतर ढंग से करने में मदद मिलेगी। विभिन्न पक्षों
के साथ बजट पूर्व विचार विमर्श को 25 दिसंबर से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
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