नई दिल्ली : बलूचिस्तान
के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक और झटका लगा है। यूरोपीय यूनियन ने दो टूक शब्दों
में साफ कह दिया है कि अगर पाकिस्तान को यूरोपीय देशों के साथ समझौते करने हैं तो
उसे बलूचिस्तान को लेकर अपनी नीति बदलनी होगी। यूरोपियन ने कहा कि बलूचिस्तान में
जो कुछ हो रहा है उसे पाकिस्तान का आंतरिक मामला नहीं माना जा सकता है।
आपको बता दे कि यूरोपियन
यूनियन का यह बयान तब आया जब बलोच नेता ब्रह्मदाग बुगती और तारेक फतेह ने यूरोपियन
पार्लियामेंट के वाइस प्रेसिडेंट रेजार्ड जारनेकी से स्विटजरलैंड में मुलाकात की।
जारनेकी के मुताबिक यह पाकिस्तान का आंतरिक मामला नहीं है। हमारे पाकिस्तान के साथ
हर तरह के समझौते है। अगर पाकिस्तान ने अपनी नीति बदली बलोचिस्तान के लिए तो हम
अपना नजरिया बदलेंगे। कुछ करने का यही सही समय है।
गौरतलब है कि
बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान से अपनी आजादी की मांग कर रहा है। इसके लिए बलोच
नेता और वहां की जनता समय-समय पर अपनी आवाजें बुलंद करती हैं। इन आवाजों को दबाने
के लिए पाक फौज वहां जबरन बल का प्रयोग करती है। लोगों पर जुल्म ढहाती है। वहीं
बलूचिस्तान में चीन ने कई परियोजनाओं में निवेश किया हुआ है। इन परियोजनाओं में से एक चीन-पाकिस्तान आर्थिक
गलियारा (सीपीईसी) है।
वहीं संयुक्त राष्ट्र
महासभा में मात खाने के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। बलोच नेता ब्रह्मदाग बुगती
को भारत में शरण देने के मुद्दे पर पाकिस्तान भड़क गया है। ब्रह्मदाग बुगती ने
भारत से संरक्षण मांगा है जबकि पाकिस्तान ने उन्हें मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट में रख
रखा है।
ऐसे में बुगती को
भारत में शरण देने के मुद्दे पर पाकिस्तान ने सख्त ऐतराज जताया है। बता दें कि
ब्रह्मदाग बुगती ने भारत में शरण के मुद्दे पर जेनेवा में भारतीय राजनयिकों से
बातचीत की। बीआरपी पाकिस्तान से बलूचिस्तान को आजाद करने की मांग कर रहा है।
आपको बता दे कि ब्रह्मदाग
बलूच नेता और बुगती जनजाति के प्रमुख नवाब अकबर बुगती के पोते हैं। साल 2006 में
पाकिस्तानी सेना ने अकबर बुगती की हत्या कर दी थी, जिसके
बाद ब्रह्मदाग ने जान बचाने के लिए बलूचिस्तान छोड़ दिया था।
पहले उन्हें
अफगानिस्तान में शरण दिया गया, जहां से वह साल 2010 में
स्विट्जरलैंड चले गए। वह बलूच राष्ट्रवादी नेता और बलूच रिपब्लिकन पार्टी (बीआरपी)
के अध्यक्ष हैं। वह बलूचिस्तान में पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाते
रहते हैं।
नई दिल्ली : बलूचिस्तान
के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक और झटका लगा है। यूरोपीय यूनियन ने दो टूक शब्दों
में साफ कह दिया है कि अगर पाकिस्तान को यूरोपीय देशों के साथ समझौते करने हैं तो
उसे बलूचिस्तान को लेकर अपनी नीति बदलनी होगी। यूरोपियन ने कहा कि बलूचिस्तान में
जो कुछ हो रहा है उसे पाकिस्तान का आंतरिक मामला नहीं माना जा सकता है।
आपको बता दे कि यूरोपियन
यूनियन का यह बयान तब आया जब बलोच नेता ब्रह्मदाग बुगती और तारेक फतेह ने यूरोपियन
पार्लियामेंट के वाइस प्रेसिडेंट रेजार्ड जारनेकी से स्विटजरलैंड में मुलाकात की।
जारनेकी के मुताबिक यह पाकिस्तान का आंतरिक मामला नहीं है। हमारे पाकिस्तान के साथ
हर तरह के समझौते है। अगर पाकिस्तान ने अपनी नीति बदली बलोचिस्तान के लिए तो हम
अपना नजरिया बदलेंगे। कुछ करने का यही सही समय है।
गौरतलब है कि
बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान से अपनी आजादी की मांग कर रहा है। इसके लिए बलोच
नेता और वहां की जनता समय-समय पर अपनी आवाजें बुलंद करती हैं। इन आवाजों को दबाने
के लिए पाक फौज वहां जबरन बल का प्रयोग करती है। लोगों पर जुल्म ढहाती है। वहीं
बलूचिस्तान में चीन ने कई परियोजनाओं में निवेश किया हुआ है। इन परियोजनाओं में से एक चीन-पाकिस्तान आर्थिक
गलियारा (सीपीईसी) है।
वहीं संयुक्त राष्ट्र
महासभा में मात खाने के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। बलोच नेता ब्रह्मदाग बुगती
को भारत में शरण देने के मुद्दे पर पाकिस्तान भड़क गया है। ब्रह्मदाग बुगती ने
भारत से संरक्षण मांगा है जबकि पाकिस्तान ने उन्हें मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट में रख
रखा है।
ऐसे में बुगती को
भारत में शरण देने के मुद्दे पर पाकिस्तान ने सख्त ऐतराज जताया है। बता दें कि
ब्रह्मदाग बुगती ने भारत में शरण के मुद्दे पर जेनेवा में भारतीय राजनयिकों से
बातचीत की। बीआरपी पाकिस्तान से बलूचिस्तान को आजाद करने की मांग कर रहा है।
आपको बता दे कि ब्रह्मदाग
बलूच नेता और बुगती जनजाति के प्रमुख नवाब अकबर बुगती के पोते हैं। साल 2006 में
पाकिस्तानी सेना ने अकबर बुगती की हत्या कर दी थी, जिसके
बाद ब्रह्मदाग ने जान बचाने के लिए बलूचिस्तान छोड़ दिया था।
पहले उन्हें
अफगानिस्तान में शरण दिया गया, जहां से वह साल 2010 में
स्विट्जरलैंड चले गए। वह बलूच राष्ट्रवादी नेता और बलूच रिपब्लिकन पार्टी (बीआरपी)
के अध्यक्ष हैं। वह बलूचिस्तान में पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाते
रहते हैं।
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