नई दिल्ली : एक बार
फिर पाकिस्तान ने UN में कश्मीर का राग गया है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान
द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने और खुद पर मानवाधिकार हनन का आरोप लगाए जाने पर
भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। भारत ने पलटवार करते हुए कहा कि उसके
नागरिकों ने लगातार पाकिस्तान के 'प्रॉक्सी
(छद्म)' आतंकवादी हमलों को सहा है और इन हमलों के जरिए
पाकिस्तान क्षेत्रीय प्रभुता के एजेंडे को आगे बढ़ाता है।
आपको बता दे कि संयुक्त
राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर मयंक जोशी ने 'राइट ऑफ पीपल टु सेल्फ-डिटर्मिनेश' विषय पर आयोजित
एक सेशन के दौरान कहा कि पाकिस्तान, जिसके खुद के नागरिक
अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से महरूम हैं और जिसने भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर के
एक हिस्से पर अवैध तरीके से कब्जा जमा रखा है, वह भारत के
खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्णय के अधिकार का हनन करता है और
क्षेत्रीय प्रभुता स्थापित करने के एजेंडे को बढ़ाता है।
पाकिस्तान के दावे
को खारिज करते हुए जोशी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और
वह लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्र और निष्पक्ष
चुनाव करवाता है।
जोशी ने कहा, 'सच्चाई तो यह है कि महिलाओं और बच्चों सहित भारत के हजारों मासूम नागरिक
पाकिस्तान के उन छद्म आतंकी हमलों से पीड़ित हैं जिन्हें हमारे इलाकों में
अंजाम दिया जाता है।'
जोशी ने कहा कि भारत
ने बार-बार यह कहा है कि पाकिस्तान व्यवहार्यता के सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों का
स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अपने पड़ोसियों के क्षेत्र पर निगाहें गड़ाने के बजाए अगर
अपने समाज के समक्ष पेश चुनौतियों की ओर ध्यान देगा, तभी
वह अपने नागरिकों की बेहतरी के लिए काम कर सकेगा।
पाकिस्तान न्यूज चैनल
के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी
प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने कहा कि कश्मीर मुद्दे का समाधान किए बिना दक्षिण एशिया
में दीर्घकालिक शांति स्थापित नहीं की जा सकती है। साथ ही उन्होंने भारत पर कश्मीर
में मानवाधिकार हनन का आरोप लगाया। लोधी ने कहा, 'कश्मीर के
लोग आजादी की चाहत से परिपूर्ण हैं और वे आत्मनिर्णय के अधिकार के प्रति दृढ़
संकल्पित हैं।'
लोधी ने कहा, 'पाकिस्तान कश्मीर समस्या का समाधान कश्मीरी लोगों की इच्छाओं और
अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव के अनुरूप करना चाहता है। कश्मीर में लाखों लोगों को
आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित रखना 21वीं सदी की दुखद घटना है। कश्मीरी लोग
सुरक्षा परिषद (संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के बारे में) के प्रस्ताव पर
अमल किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।' लोधी ने दावा किया कि
कश्मीर के लोग भारत से आजादी चाहते हैं।
नई दिल्ली : एक बार
फिर पाकिस्तान ने UN में कश्मीर का राग गया है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान
द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने और खुद पर मानवाधिकार हनन का आरोप लगाए जाने पर
भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। भारत ने पलटवार करते हुए कहा कि उसके
नागरिकों ने लगातार पाकिस्तान के 'प्रॉक्सी
(छद्म)' आतंकवादी हमलों को सहा है और इन हमलों के जरिए
पाकिस्तान क्षेत्रीय प्रभुता के एजेंडे को आगे बढ़ाता है।
आपको बता दे कि संयुक्त
राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर मयंक जोशी ने 'राइट ऑफ पीपल टु सेल्फ-डिटर्मिनेश' विषय पर आयोजित
एक सेशन के दौरान कहा कि पाकिस्तान, जिसके खुद के नागरिक
अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से महरूम हैं और जिसने भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर के
एक हिस्से पर अवैध तरीके से कब्जा जमा रखा है, वह भारत के
खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्णय के अधिकार का हनन करता है और
क्षेत्रीय प्रभुता स्थापित करने के एजेंडे को बढ़ाता है।
पाकिस्तान के दावे
को खारिज करते हुए जोशी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और
वह लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्र और निष्पक्ष
चुनाव करवाता है।
जोशी ने कहा, 'सच्चाई तो यह है कि महिलाओं और बच्चों सहित भारत के हजारों मासूम नागरिक
पाकिस्तान के उन छद्म आतंकी हमलों से पीड़ित हैं जिन्हें हमारे इलाकों में
अंजाम दिया जाता है।'
जोशी ने कहा कि भारत
ने बार-बार यह कहा है कि पाकिस्तान व्यवहार्यता के सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों का
स्पष्ट उल्लंघन करते हुए अपने पड़ोसियों के क्षेत्र पर निगाहें गड़ाने के बजाए अगर
अपने समाज के समक्ष पेश चुनौतियों की ओर ध्यान देगा, तभी
वह अपने नागरिकों की बेहतरी के लिए काम कर सकेगा।
पाकिस्तान न्यूज चैनल
के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी
प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने कहा कि कश्मीर मुद्दे का समाधान किए बिना दक्षिण एशिया
में दीर्घकालिक शांति स्थापित नहीं की जा सकती है। साथ ही उन्होंने भारत पर कश्मीर
में मानवाधिकार हनन का आरोप लगाया। लोधी ने कहा, 'कश्मीर के
लोग आजादी की चाहत से परिपूर्ण हैं और वे आत्मनिर्णय के अधिकार के प्रति दृढ़
संकल्पित हैं।'
लोधी ने कहा, 'पाकिस्तान कश्मीर समस्या का समाधान कश्मीरी लोगों की इच्छाओं और
अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव के अनुरूप करना चाहता है। कश्मीर में लाखों लोगों को
आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित रखना 21वीं सदी की दुखद घटना है। कश्मीरी लोग
सुरक्षा परिषद (संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के बारे में) के प्रस्ताव पर
अमल किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।' लोधी ने दावा किया कि
कश्मीर के लोग भारत से आजादी चाहते हैं।
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