नई
दिल्ली : पाकिस्तानी ऐक्टर हामजा अली अब्बासी को आतंकी
बुरहान वानी को शहीद बताना महंगा पड़ गया। जब फेसबुक ने उनकी उस पोस्ट को हटाया
जिसमें उन्होंने भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों कश्मीर में मारे गए हिजबुल
मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के प्रति समर्थन जाहिर किया था।
इस पोस्ट को लेकर फेसबुक ने
उनका अकाउंट ही सस्पेंड कर दिया था। हालांकि बाद में पोस्ट डिलीट करने के बाद उनके
अकाउंट को बहाल कर दिया गया।
अब्बासी ने फेसबुक पर लिखा था, 'इस आदमी को देखिए। यह कोई आईएसआई का एजेंट नहीं है। यह कोई पाकिस्तानी
फंडेड और मुल्लाओं से प्रेरित मिलिटेंट नहीं है। यह शहीद बुरहान वानी है। यह
कश्मीरी है।
इसने इंडियन आर्मी द्वारा
अपने भाई के मारे जाने के बाद कश्मीर की आजादी की लड़ाई में खुद को शामिल कर लिया
था। यदि कश्मीरियों और यूएन प्रस्ताव के मुताबिक कश्मीर का समाधान नहीं निकाला
जाता है तो हमारे पास में एक नया फिलीस्तीन बनने जा रहा है।'
#IAmBurhanWani #BurhanWaniShaheed #Kashmir
बता दे कि इसी पोस्ट के लिए
फेसबुक ने अब्बासी का अकाउंट सस्पेंड किया और फिर पोस्ट डिलीट करने के बाद बहाल कर
दिया। फेसबुक के इस कदम को अब्बासी ने पीड़ितों के पक्ष में अवाज उठाने पर
अभिव्यक्ति की आजादी को पाबंदी लगाने वाला बताया है।
नई
दिल्ली : पाकिस्तानी ऐक्टर हामजा अली अब्बासी को आतंकी
बुरहान वानी को शहीद बताना महंगा पड़ गया। जब फेसबुक ने उनकी उस पोस्ट को हटाया
जिसमें उन्होंने भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों कश्मीर में मारे गए हिजबुल
मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के प्रति समर्थन जाहिर किया था।
इस पोस्ट को लेकर फेसबुक ने
उनका अकाउंट ही सस्पेंड कर दिया था। हालांकि बाद में पोस्ट डिलीट करने के बाद उनके
अकाउंट को बहाल कर दिया गया।
अब्बासी ने फेसबुक पर लिखा था, 'इस आदमी को देखिए। यह कोई आईएसआई का एजेंट नहीं है। यह कोई पाकिस्तानी
फंडेड और मुल्लाओं से प्रेरित मिलिटेंट नहीं है। यह शहीद बुरहान वानी है। यह
कश्मीरी है।
इसने इंडियन आर्मी द्वारा
अपने भाई के मारे जाने के बाद कश्मीर की आजादी की लड़ाई में खुद को शामिल कर लिया
था। यदि कश्मीरियों और यूएन प्रस्ताव के मुताबिक कश्मीर का समाधान नहीं निकाला
जाता है तो हमारे पास में एक नया फिलीस्तीन बनने जा रहा है।'
#IAmBurhanWani #BurhanWaniShaheed #Kashmir
बता दे कि इसी पोस्ट के लिए
फेसबुक ने अब्बासी का अकाउंट सस्पेंड किया और फिर पोस्ट डिलीट करने के बाद बहाल कर
दिया। फेसबुक के इस कदम को अब्बासी ने पीड़ितों के पक्ष में अवाज उठाने पर
अभिव्यक्ति की आजादी को पाबंदी लगाने वाला बताया है।
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